वाराणसी। बागपत जेल में सोमवार की सुबह हत्या के बाद माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया था। मंगलवार की सुबह सवा सात बजे भारी सुरक्षा के बीच शव उसके पैतृक गांव पूरे दयाल (सुरेरी) पहुंचा। शव पैतृक आवास में पहुंचते ही परिजन समेत ग्रामीणों व क्षेत्रीय लोगों में कोहराम मच गया। कुछ देर में सैकड़ों की भीड़ जुट गयी। लोगों ने बजंरगी अमर रहे के नारे लगाये। सिर पर सफेद दुपट्टा रखे पत्नी सीमा सिंह, बेटी सिमरन और बेटा समीर सहित परिवार के लोगों ने पुष्प अर्पित किये। दो घंटे तक शव गाँव में रहने के बाद शवयात्रा वाराणासी के मणिकर्णिका घाट के लिए निकला। बजंरगी अमर रहे के नारे लगाये गए।

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नहीं दिखा कोई राजनेता या नामचीन चेहरा

बजरंगी को पूर्वांचल में राजनैतिक हत्याओं के लिए जाना जाता रहा। एक बार खुद और दूसरी बार पत्नी को विधानसभा चुनाव भी लड़ाया था। भाजपा को छोड़ सपा से लेकर दूसरे राजनैतिक दलों के बड़े नेताओं से बजरंगी के करीबी संबंध होने के दावे भी किये जाते थे। बावजूद इसके शवयात्रा घर से निकली तो कोई नेता मौजूद नहीं था। अलबत्ता कई कारोबारी या जिनसे करीबी संबंध थे वह जरूर दिखे। आगे डीह के पास शव रखकर कर्मकांड की औपचारिकता पूरी की गयी। इसके बाद कसेरू चौराहे पर शव एक घण्टे रखा गया था। फिर बजरंगी का शव अंतिम संस्कार के लिए 9.20 बजे मणिकर्णिका घाट के लिए निकल गया। काफिले में 50 से अधिक वाहन और सुरक्षाकर्मियों के लोग शामिल है।

पुलिस दिखी सतर्क, वीडियोग्राफी से बचते दिखे कई

बजरंगी गिरोह से जुड़े लोगों के उसकी शवयात्रा में शामिल होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधों के संग वीडियोग्राफी कराने का निर्णय लिया था। इसकी भनक लगने पर काफिले में शामिल आधे से अधिक वाहन शहर की सीमा में आने के बाद दूसरी तरफ मुड़ गये। परिवार के सदस्यों के अलावा करीबी लोग ही मणिकर्णिका तक पहुंचे थे। इनमें भी कई पुलिस की वीडियोग्राफी से बचने के लिए गलियों की तरफ बढ़ गये।

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