वाराणसी। अपर सत्र न्यायाधीश द्वादश की कोर्ट ने आदमपुर थाना क्षेत्र के भदऊं चुंगी के पास लूट के जेवरातो और अवैध असलहो के साथ पकड़े गए सीआरपीएफ जवान बृजेश रॉय व राजेश सिंह समेत 5 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में सन्देह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज यादव और विपिन शर्मा के मुताबिक 21 अगस्त 2009 को रात 11 बजे आदमपुर थाना प्रभारी गिरिजाशंकर त्रिपाठी को सुचना मिली कि कुछ शातिर लुटेरे भदऊं चुंगी तिराहे के पास आने वाले है। सूचना पर पुलिस ने वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी। उसी दौरान दो बाइक पर सवार 4 व्यक्ति आते दिखाई दिए। जब उन्हें रुकने का इशारा किया तो वह पुलिस टीम पर फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश करने लगे, तभी पुलिस ने घेरेबंदी कर चारो को धर-दबोचा। पूछताछ में उन सभी ने अपना नाम राजेश तिवारी,मनीष रॉय,मृत्युंजय और अरविन्द कश्यप निवासी आजमगढ़ बताया।

बदमाशों के बयान पर पकड़े गये थे सीआरपीएफकर्मी

बदमाशों की तलाशी में उनके पास से चोलापुर से लूटी गई सोने की चेन,अंगूठी व जौनपुर के एक सराफा कारोबारी से लूटी गई चांदी की सिल्ली और तमंचा व कारतूस बरामद किया। कड़ाई से पूछताछ में उन्होंने खुद को लुटेरा बताया। पूछताछ में उन लोगों ने बताया कि वह लोग अपने साथी सीआरपीएफ जवान बृजेश राय निवासी गाजीपुर और राजेश सिंह निवासी औरंगाबाद (बिहार) के साथ मिलकर लूट और असलहा तस्करी का धंधा करते है। इनकी निशानदेही पर सीआरपीएफ जवानो को उनके क्वार्टर से गिरफ्तार कर डेढ़ दर्जन असलहे बरामद किये। अदालत में विचारण के दौरान आरोप सिद्ध नही होने पर सभी को बरी कर दिया।

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