फीस हो या ड्रेस: अब डीएम ने कस दिया है ‘पेंच’, दुरुस्त नहीं किये वाहन तो शुरू होगा जब्तीकरण

वाराणसी। निजी कांवेंट स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाते थे। यही नहीं स्टेशनरी से लेकर स्कूलों की ड्रेस को लेकर भी फरमान जारी रहता था। डीएम कौशल राज शर्मा ने इस प्रवृति पर अंकुश कस दिया है। अब फीस वृद्धि में अब स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। फीस निर्धारण के संबंध में 60 दिन पहले इसका सम्पूर्ण विवरण वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। डीएम ने साफ किया है कि जो स्कूल 31 जनवरी तक ऐसा नहीं करेंगे वे फीस नहीं बढ़ा सकेंगे और उन्हें पुरानी फीस ही लेनी पड़ेगी। डीएम ने यह भी साफ कर दिया है कि टीचर को बढ़ाये गये इन्क्रिमेंट के अनुसार ही फीस बढ़ाया जा सकता है जो अधिकतम 8.71% से अधिक नहीं होगा। स्कूलों के ड्रेस 5 साल से पहले नहीं बदले जा सकते। स्कूल अभिभावकों को किसी प्रकार निर्धारित दुकान से किताबें अथवा ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते और न ही स्कूलों में किताबें आदि बेच सकते हैं।

स्कूली वाहनों के लिए यह है आदेश

डीएम ने इसके साथ ही स्कूलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में कहा कि स्कूली बच्चों को स्कूल तक सुरक्षित पहुंचाने और वापस घर तक लाने के लिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वाहनों से सम्बंधित निर्धारित नियमों का पालन प्रत्येक दशा में सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने सभी स्कूलों को निर्देश दिए कि नियमानुसार वाहनो का फिटनेस, सीसीटीवी कैमरे, फर्स्ट एड, जीपीएस आदि लगवा लें। इसके लिए 20 फरवरी तक का समय दिया गया। 21 फरवरी से परिवहन अधिकारी को एफआईआर कराने और गाड़ियों को सीज करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही आरटीओ को निर्देश दिए कि अगले तीन-चार दिनों में सभी स्कूलों की गाड़ियों, स्कूलों से अनुबंधित गाड़ियों का डाटाबेस तैयार करें और इनके अलावा अन्य कोई भी वाहन स्कूल के बच्चों को ढ़ोने का काम नहीं करेंगे। स्कूलों के खुलने और बन्द होने के समय गेट पर रोस्टर के अनुसार ड्यूटी लगाकर बच्चों को लाने और ले जाने वाली गाड़ियों की वीडियोग्राफी कराने तथा इनके लाइसेंस की जांच कराने का निर्देश परिवहन अधिकारी को दिया। गाड़ियों के चालान के पश्चात कोर्ट से छूट कर पुन: स्कूल के बच्चों को लेकर चलने लगते हैं इसकी भी जांच करायें और तीन बार चालान हो चुके वाहन का रजिस्ट्रेशन भी निरस्त करें।

15 अक्टूबर के बाद वार्षिक कार्यक्रम पर रोक

डीएम ने स्कूल के बच्चों को फायर फाइटिंग, भूकंप व अन्य आपदा से निपटने की ट्रेनिंग भी देने के लिए रेडक्रास व सिविल डिफेंस को पत्र लिखने का निर्देश दिया। स्कूल सम्बंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक को स्कूलों के वाट्सएप ग्रुप बनाने का निर्देश दिया। स्कूलों का एकेडमिक कैलेंडर जारी करने का निर्देश देते हुए कहा कि 15 अक्टूबर के बाद कोई भी स्कूल वार्षिक प्रोग्राम नहीं करायेंगे।

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