सब्जियों के उन्नत किस्मों के बीज को लेकर किसानों की न टूटे आस इसके लिए कदम उठाया खास

वाराणसी। काशी और गाजीपुर की मिर्च अब खाड़ी देशों के बाजार तक पहुंच चुकी है। सब्जियों की खेती से पूर्वांचल के किसानों की स्थिति सुधर सकती है लेकिन इसके बीजों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। सब्जियों की उन्नत किस्मों के व्यवसायीकरण हेतु भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने सोलेनैसियस प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया। इसके तहत शनिवार को संस्थान से विकसित टमाटर, बैंगन एवं मिर्च की प्रजातियों एवं उच्चीकृत जननद्रव्यों के प्रदर्शन एवं व्यवसायीकरण निजी क्षेत्र की 19 प्रमुख बीज कंपनियों को आमंत्रित किया गया था।

बाजार की मांग के अनुसार शोध पर जोर

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत चलाये जा रहे इन कार्यक्रमों को संस्थान द्वारा विकसित सब्जियों की उन्नत किस्मों के लाभ को किसानों तक पहुचाने में उपयोगी बताया। इस कार्यक्रम में बैंगन, मिर्च एवं टमाटर की विभिन्न उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया गया जिसको निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा अपनी कंपनी के आवश्यकतानुसार मूल्यांकित एवं चयनित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों एवं संस्थान के वैज्ञानिकों के बीच परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रतिभागियों ने बाजार की मांग के अनुसार कुछ अन्य विशिष्ट गुणों पर शोध करने पर भी बल दिया। संस्थान ने पूर्व में भी इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर संस्थान की उन्नत किस्मों का लाइसेंस निजी क्षेत्र को प्रदान किया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से इन प्रजातियों को देश भर के सब्जी किसानों तक पहुचाने में मदद मिलती है और साथ ही साथ संस्थान को राजस्व भी प्राप्त होता है।

इनकी रही भागेदारी

कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की 19 प्रमुख बीज कंपनियों सनग्रो, सकाटा, कावेरी, नाथ बायोजीन्स, मेटा हेलिक्स, एचएम क्लाज, किसान क्रॉप, ईगल, ईस्ट वेस्ट, ताइशिता एग्रोटेक, रूचि हाइरीच, ऋषिराज, नोबल, सफल, बॉम्बे सुपर, सीड वर्क, दिनकर, इंडिगो एवं इंडो अमेरिकन बीज कंपनी के 35 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान की पंचवार्षिक समीक्षा दल के सदस्य डॉ प्रीतम कालिया ने किया। इस अवसर पर दल के अन्य सदस्य डा. प्रद्युम्न कुमार, डा.आर रत्नाकर एवं संस्थान के कार्यकारी निदेशक डा. एसके वर्मा भी उपस्थित थे। क्षेत्रीय तकनीकी प्रबंधन इकाई के प्रभारी डा. प्रभाकर मोहन सिंह ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के वैज्ञानिक डा.राजेश कुमार, डा. शैलेश कुमार तिवारी, डा. अच्युत कुमार सिंह एवं डा. इन्दीवर प्रसाद ने योगदान किया। संचालन डा. शैलेश कुमार तिवारी ने किया।

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