फेल हो गयी छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों की रणनीति! पुलिस ने रीशू को यूं दबोचा

वाराणसी। मूल रूप से आरा (बिहार) का रहने वाला ऋषभ सिंह उर्फ रीशू अपने साथी कुंदन सेठ उर्फ कुंदन सिंह की तरह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का छात्र नहीं था। बावजूद इसके वह कैंपस में लक्जरी वाहनों से घूमता ही नहीं था बल्कि बड़ी संख्या में छात्र उससे सिफारिश करने के लिए मंडराते थे। वजह, रीशू छात्रसंघ के कई पूर्व पदाधिकारियों का बेहद करीबी था। निकटता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जेएचवी मॉल में गोलीकांड के बाद उसने एक दिन तक काशी में ही शरण ले रखी थी। भोजपुर में मुठभेड़ के दौरान बिहार के कुख्यात बदमाश मनीष सिंह उर्फ हीरो के मारे जाने और कुंदन की गिरफ्तारी के बाद रीशू ने एक बार फिर आकाओं से सम्पर्क साधा था। सूत्रों की माने तो कोर्ट में आत्मसमर्पण कराने का प्लान आकाओं ने तैयार किया था लेकिन सफल नहीं हो सके। इसकी भनक पुलिस को पहले ही लग गयी जिसका नतीजा कोर्ट के आसपास घेराबंदी कर ली गयी।

पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे

लोहता इलाके में साहसिक मुठभेड़ के दौरान इनामी रीशू की गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर आला अधिकारी डीडीयू अस्पताल पहुंचे और टीम को शाबासी देने के साथ रीशू से पूछताछ की। सूत्रों की माने तो रीशू ने शरणदाताओं के नाम कबूले हैं जिनके संरक्षण में वह फल-फूल रहा था। उसने यह भी स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में अवैध असलहों को बेचा है। विद्यापीठ में सक्रिय होने के पीछे वजह यही थी कि किसी को शक नहीं होगा और अपराध में सक्रियता बनी रहेगी।

कड़ी कार्रवाई की तैयारी

जेएचवी मॉल कांड से हुई किरकिरी के बाद पुलिस-प्रशासन भी सख्त कार्रवाई का मन बना चुका है। मुकदमा भले आईपीसी की धाराओं के तहत हुआ है लेकिन निरोधात्मक कार4वाई के तहत रासुका में भी निरुद्ध करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। एक पखवारे में सभी आरोपितों पर कानूनी शिकंजा कसने के साथ पुलिस इस मामले को दूसरों के लिए नजीर बनाना चाहती है कि कार्रवाई कितनी सख्त हो सकती है।

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