भारत मे आजादी की लडाई की दो धारा थी, एक जो सीधे सीधे अंग्रेजो से टकरा रही थी और संपूर्ण आजादी प्राप्त करने के लिये लड रही थी।
इस धारा के महानायक सिदो संथाल, बिरसा मुंडा, तात्या टोपे, स्वामी सहजानंद , चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस जैसे बलिदानी लोग थे।

आजादी की लडाई की दूसरी धारा थी कि अंग्रेजो के अधीन हमें होमरूल प्राप्त हो, इस धारा के नेता रानाडे, गोखले, महात्मा गांधी, पं जवाहर लाल नेहरू , राजेन्द्र प्रसाद, नरेन्द्र देव, लोहिया , जयप्रकाश , गोपालाचारी आदि थे ।
15 अगस्त 1947 को दूसरी धारा विजयी हो गयी और उनकी इच्छा के अनुरूप काॅमनवेल्थ के अंतर्गत होमरूल प्राप्त हो गया और हमे संम्पूर्ण आजादी की जगह आए आधी आजादी मिली।

वर्तमान मे देश मे जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र का झगडा बढ रहा है , समकालीन राजनीति भी जातिवाद और धार्मिक अंधविश्वास की दासी बनी हुई है, धार्मिक उन्माद बढता जा रहा है, और राष्ट्रीय एकता खतरे मे पडती दिखाई दे रही है।
ऐसी परिस्थिति से हमे नेता जी सुभाष चंद्र बोस ही निकाल सकते हैं।

उनके द्वारा गठित आजाद हिंद फौज जाति और धर्म से परे था , आजादी की लडाई मे सुभाष बाबू के नेतृत्व मे हिंदु और मुसलमान कंधे से कंधा मिलाकर लडे और अपनी कुर्बानी दिये। यह उनके ही बलिदान का फल है कि हम सब आजाद हुये।

आजाद हिंद फौज के संपर्क मे आकर भारत की देशी सेना भी बगावती हो गयी थी और फौजी विद्रोह से डरकर अंग्रेजो ने सन 1948 की तय तिथि से एक साल पहले 1947 मे हमे आजाद कर दिया।
इंग्लैंड के प्रधानमंत्री “एटली” और सेनापति ” आचिनलेक” ने भी इसे स्वीकारा ।

इस सत्य को जनता से छिपाया गया है।

नमन है महान विप्लवी ,
हमारे जननायक
सुभाष चंद्र बोस को…

साभार-मनजीत शर्मा
प्रबंधक
स्वामी सहजानंद मिशन स्कूल
सुंदरपुर , वाराणसी

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