लखनऊ। लगभग दो दशक पहले तक प्रदेश के शराब कारोबार पर कुछ व्यापारियों का एकाधिकार रहता था। वजह, निलामी जिला स्तर पर होती थी जिसके चलते छोटे कारोबारी शामिल होने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते थे। इसे तत्कालीन भाजपा सरकार के आबकारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने ध्वस्त कर दिया। उनके कार्यकाल में हर दुकान की निलामी हुई जिसमें सिंडिकेट पूरी तरह से टूट गया और छोटे कारोबारी हावी होने लगे। एक दशक पहले मायावती की सरकार बनी तो उन्होंने दुकानों की व्यवस्था तो बरकरार रखी लेकिन जोन के हिसाव से सप्लाई करने का लाइसेंस अलग से जारी किया। इसी के जरिये प्रदेश में फोंटी चड्ढा की इंटी हुई। कारोबारी इन्ही से शराब लेते थे जिससे जो ब्रांच सिंडिकेट चहता वही बिकता। सपा की सरकार बनी तो लेकिन इसमें कोई बदलव नहीं हुआ जिससे फोंटी की मौत के बाद भी ग्रुप का एकाधिकार थोक कारोबार पर बना रहा। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के पहले दुकानों के लाइसेंस की नवीनीकरण हो चुका था। आसार लगाये जा रहे है कि इतिहास फिर दोहराया जायेगा।

चड्ढा ग्रुप पर भारी जुर्माने से चर्चाओं का बाजार गर्म

बताया जाता है कि चड्ढा ग्रुप की कंपनी एक्यूरेट फूड्स एंड बेवरेजेज पर 53.91 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। सूत्रों की माने तो मेरठ जोन में नियमों का उल्लंघन करते हुए 453 दुकानों की किश्त नहीं जमा की थी जबकि संचालन धडल्ले से किया जा रहा था। आबकारी मंत्री जेपी सिंह के संज्ञान में बगैर किश्त जमा किये दुकान चलाने का प्रकरण आया तो उन्होंने भारी जुर्माने के आदेश दिये हैं। इसके लिए 6 जनवरी तक समय सीमा नियत की गयी है अन्यथा लाइलेंस रद करने से लेकर वसूली तक की प्रकृया आरम्भ हो जायेगी। इसकी जानकारी मिलने के बाद से चर्चाओं का बाजार गर्म है।

सरकार बनने के बाद से चल रही पैरवी

एक दशक से प्रदेश में जिसकी भी सरकार हो चड्ढा ग्रुप उसे साधने में सफल रहा। भाजपा की सरकार की कमान योगी के हाथ में आने से मुसीबतें शुरू हो गयी है। बावजूद इसके प्रयास किये जा रहे हैं। वजह, भाजपा की सरकार में कई ऐसे हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शराब के कारोबार से जुड़े हैं। राजधानी में लाबिंग चल रही है लेकिन इससे पहले आबकारी मंत्री का फरमान गले की फांस बन गया है।

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