महारानी अहिल्याबाई की सम्पत्तियों को लेकर उठे सुलगते सवाल, भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग

वाराणसी। गंगा तट पक काशी का प्रसिद्घ अहिल्याबाई घाट व महल होल्कर राज्य की महारानी की तपस्यास्थली है। इसी भूमि पर अहिल्याबाई ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्स्थापना का संकल्प लिया और उसे अपने जीवन में पूर्ण कर दिया। भवन संख्या डी -18/16 ऐतिहासिक, धार्मिक एवं वास्तु कि दृष्टि से महत्वपूर्ण है जिसमे मां गंगा की अति दुर्लभ प्राचीन मूर्ति स्थापित है। यह भवन प्राचीन धरोहर, पुरातत्व्यीय स्थान तथा अवशेष अधिनियम 24 सन 1958 से संरक्षित है। अब जबकि काशी के धरोहर की सुरक्षा का युगान्तकारी कार्य प्रारम्भ है तथा काशी विश्वनाथ की संरक्षा में सरकार करोड़ो रुपये खर्च कर रही है, ऐसी स्थिति में उन्ही महारानी द्वारा बनायी कोठी एवं अन्य मंदिरो की अनदेखी कर देना भूमाफियाओ को खुली छूट देना शासन के लिये प्रश्नचिन्ह उपस्थित करता है। महारानी अहिल्याबाई स्मृति संरक्षण समिति के तत्वावधान में अहिल्याबाई कोठी में मीडिया से बातचीत के दौरान श्रुति नागवंशी, पार्वती देवी, अमला सिंह व विभा मिश्रा ने मौजूदा व्यवस्था को लेकर सुलगते सवाल उठाये।

तपोस्थली को दे दिया होटल का स्वरूप

समिति का कहना है कि काशी के हृदयस्थल पर स्थित धार्मिक परम्परा का प्रतीक एवं वास्तु कि दृष्टि से महत्वपूर्ण इस भवन में होल्कर राज्य के भारत सरकार में विलय से पूर्व के वैधानिक अध्यासी, सेवक, भक्त, अनुयायी किरायेदार रहते हैं। ट्रस्ट बन जाने के बाद भी वह किराया अदा करते आ रहे हैं। वर्तमान समय में डी -18/16 एवं अन्य भवनों को मौखिक खरीद के नाम पर उसमे आबाद गरीब असहाय काशी भक्त लोगों को निकालने हेतु कतिपय भूमाफिया द्वारा संपत्ति की सुरक्षा के लिए गठित ट्रस्टियों एवं अधिकारियों के साथ मिल कर खेल चल रहा है। येन केन प्रकारेण भवन की व्यवस्था को समाप्त करके गंगा तट के पवित्र भूमि पर स्थित इस महल को आधुनिक होटल का स्वरूप दे कर आमिष भोजनालय एवं आमोद प्रमोद का साधन बनाना चाहते हैं। ऐसे धन लोलुप व्यक्ति काशी की संस्कृति को नष्ट कर के धन कमाने के उद्देश्य से महारानी के महल व अन्य भवनों पर कब्जा जमाते जा रहे हैं।

सीबीआई जींच की लगायी गुहार

समिति की मांग है कि वर्तमान समय में ऐसे लोगों को प्रतिबंधित करना नितान्त आवश्यक है। लघुवाद जज वाराणसी के न्यायालय में लम्बित मुकदमे में उल्लेखनीय सफलता न मिलने के कारण सुनियोजित ढन्ग से किरायेदारो को डरा धमका कर एवं फर्जी मुकदमे में फसा कर प्रताड़ित कर के भवन को हड़पने एवं कब्जा करने का उपक्रम चल रहा है। यहां की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। होल्कर बाडा में रहने वाले लोग नित्यप्रति किसी न किसी षड्यन्त्र का शिकार बनाये जाते हैं तथा अपशब्दों के साथ जबरन बेदखल करने की बात आये दिन की जाती है, जिससे महारानी के शान्तिप्रिय भक्त भयाक्रान्त हैं। सरकारी नियमों के अनुसार ट्रस्ट के भवन के विक्रय का अधिकार ट्रस्टी को नहीं है, ऐसा ही मामला अन्य स्थानों पर भी संज्ञान में आया है। अब जरूरत इसकी है कि उक्त सभी संपत्तियों की मौजूदा स्थिति की सीबीआई जांच भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से कराइ जाये ताकि गंगा तट पर स्थित इस सम्पत्ति एवं अहिल्याबाई होल्कर द्वारा लोक-कल्याण हेतु कराये गये 12,672 निमार्णों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर उन धरोहर की बिक्री तथा अवैध कब्जों को रोका जा सके े जिससे इसके अस्तित्व को बचाया जा सके।

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