‘अफसर’ बनकर लगायी दर्जनों को लाखों की चपत, एसटीएफ ने दबोचा तो कबूल किया यह सच

वाराणसी। पिछले कुछ समय से वाराणसी और पूर्वांचल ही नहीं बल्कि बिहार तक में ठगी की ऐसी घटनाएं प्रकाश में आ रही थी जिसमें आभूषण व्यवसायियों को निशाना बनाया जाता था। काफी मामले तो पुलिस के रोजनामचे तक नहीं आ पाते थे और जो दर्ज होते भी उसमें कार्रवाई का ग्राफ शून्य था। एसटीएफ वाराणसी यूनिट के प्रभारी डिप्टी एसपी वीके सिंह के निर्देश पर छापेमारी में इन घटनाओं को ंजाम देने वाला बृजेश कुमार खरवार चढ़ा तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। बृजेश न सिर्फ व्यवसायियों को झांसा देकर आभूषण पार करता था बल्कि फौरन उसे गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के यहां गिरवी रख कर नकदी उठा लेता था। अंदाज इतना शातिराना था कि किसी को आभास तक नहीं होता था और वारदात को अंजाम देकर सफाई से निकल जाता था।

घर पर गहने खरीदने बुलाता था

इंस्पेक्टर विपिन राय और अमित श्रीवास्तव ने छापेमारी में पकड़ने के बाद पूछताछ की तो बृजेश ने बताया व्यवसाय में अत्याधिक घाटा तथा पारिवारिक विवाद के कारण उसने अत्याधिक कर्जा ले लिया था। इसकी अदायगी वह नहीं कर पा रहा था। इस पर उसने शार्टकट से पैसा कमाने के लियेसर्राफा व्यवसायियों को ठगने की योजना बनायी। वह कई दिनों तक सर्राफा व्यवसायी के दुकान की रेकी करता था और फिर दुकान पर जाकरअपने को बैंक का अधिकारी बताता था। लोन आदि दिलाने में मदद करने की बात करके अपने विश्वास में ले लेता था।इसके बाद वह स्वर्ण आभूषण पत्नी के लिये खरीदने की बात कहता था। पत्नी के गर्भवती होने का वास्ता देकर दुकान पर न आकर दुकानदार या उसके सेल्समैन को घर पर आकर आभूषण दिखाने के लिये तैयार कर लेता था। जब दुकानदार घर परआने के लिये तैयार हो जाता था तो दुकान के आस-पास किसी मुहल्ले में एक मकान किराये पर ले लेता था और मकान मालिक को बताता कि कल मेरे कुछ मित्र आने वाले हैं। मकान ऐसा होता जिसमें पीछे का रास्ता हो। गहने पत्नी को दिखाने के बहाने वह भीतर जाता और दूसरे रास्ते से निकल लेता।

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