वाराणसी। सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में छापेमारी से बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र एक्शन मोड में आ गये। डीएम ने गुरुवार को कांशीराम शहरी आवास योजनान्तर्गत आवास आवंटन सहित अन्य विभागीय कार्यो में अनियमितता बरतने के कारण कलेक्ट्रेट के लिपिक रामवृक्ष को निलम्बित कर विभागीय जांच का आदेश दिया है। छापेमारी में पकड़े गये जालसाजों ने कबूल किया था कि आवास आवंटन में रामवृक्ष की संलिप्तता है और हर घर को देने के एवज में उसे 10 हजार रुपया देते हैं। दर्जनों आवास इस तरह से फर्जी कागजात के आधार पर देने की प्रथम दृष्टया पुष्टि होने पर कार्रवाई का सिलसिला आरम्भ हुआ है जिसकी जद में कई और के भी आने की संभावना है।

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शिक्षा विभाग पर भी चला ‘चाबुक’

फर्जी आय-जाति और निवास प्रमाणपत्रों के बूते विद्यालयों में दाखिले से लेकर छात्रवृत्ति लेने तक का खेल भी उजागर हुआ था। वहां से शिक्षा विभाग से संबंधित मुहरें और दूसरे कागजात मिले थे। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम ने गुरुवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में औचक छापेमारी की जिससे हडकंप मच गया। डीएम ने विद्यालयों के मान्यता प्रकरण में जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय द्वारा हीला-हवाली एवं लापरवाही बरतने की शिकायत पर छापेमारी की थी। डीएम ने इस दौरान मान्यता पत्रावलियों को बिनावजह लटकाये जाने एवं अन्य अनियमितता के कारण बेसिक शिक्षा कार्यालय के पटल सहायक जीतेन्द्र श्रीवास्तव एवं राजेश्वर श्रीवास्तव को तत्काल् प्रभाव से निलम्बित कर विभागीय जांच का आदेश दिया है।

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