वाराणसी। भले समूचा कार्यकाल विवादों के घेरे में रहा है। एक साथ कई मौतें हुई हों या वहां पर काम करने वाली को बेड नहीं। बावजूद इसके बीएचयू प्रशासन सर सुन्दरलाल अस्पताल के सुपरिटेंडेट रहे डा. ओपी उपाध्याय से नाता तोड़ने के लिए इच्छुक नहीं दिख रहा है। आरोप है कि उम्र 62 साल से अधिक होने के चलते उन्हें पद पर बरकरार नहीं रखा जा सकता था तो इसके लिए बैक डोर का रास्ता ढूंढा गया। असिस्टेंट रजिस्ट्रार (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) ने चार जुलाई को सूचना जारी की है कि डा. उपाध्याय सरसुंदर लाल अस्पताल के सुधार कार्यक्रमों का ब्योरा तैयार करने के संग आईएमएस बीएचयू को उच्चीकृत करने की खातिर बनी सात सदस्यीय समन्वय समिति के अध्यक्ष रहेंगे। खास यह कि वीसी प्रो. राकेश भटनागर ने यह दायित्व सौंपा है।

दो दिन पहले हटाये गये थे

गौरतलब है कि वीसी ने ही सोमवार सुबह स्टाफ नर्स की मौत के बाद डा. उपाध्याय को एमएस पद से हटाया था। आरोप था कि नर्स की हालत रविवार की रात बिगड़ गई थी लेकिन आईसीयू में बेड नहीं जिससे वह छह घंटे तक स्ट्रेचर पर ही छटपटाती रही। इसके बाद घरवालों के संग दूसरी नर्सों ने जमकर बवाल काटते हुए वीसी आवास के बाहर धरना तक दिया था। अस्पताल सूत्रों का दावा है कि डा. उपाध्याय इस पर भी नहीं हटाये जाते लेकिन उनकी राह में वह आदेश आ गया जिसमें साफ लिखा है कि 62 साल के बाद प्रशासनिक पद पर कोई नहीं रह सकता। वैसे भी कार्यकाल दो जुलाई को खत्म हो चुका था जिसके चलते आईएमएस के निदेशक प्रो वीके शुक्ल को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।

पहले कमेटी गठित होने ता दावा

कमेटी के दूसरे सदस्य में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग से एसके सिंह, पिडियाट्रिक विभाग से प्रो. ओपी मिश्रा, माइक्रो बायोलॉजी से प्रो. गोपाल नाथ, कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरासिस सर्जरी से डा. एस लोकनाथ, न्यूरो सर्जरी के डा. नित्यानंद पांडेय तथा न्यूरोलाजी विभाग के डा. अभिषेक पाठक। बीएचयू प्रशासन का दावा है कि कमेटी का गठन पिछले माह 19 जून को एनआईटीआई आयोग की बैठक में हो चुका था। अलबत्ता इसे बुधवार को जारी किया गया है।

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