वाराणसी। बसपा शासनकाल के अंतिम दिनों में मुरादाबाद में एक सनसनीखेज वारदात हुई थी। यहां के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर ने महिला के साथ महीनों तक गैंगरेप किया। एक बार पीड़िता की डेढ़ साल की बच्ची यह देखकर रोने लगी तो हिस्ट्रीशीटर ने पत्थर पर पटक कर उसकी जान ले ली। चंगुल से छूटने के बाद पीड़िता अपने घर गयी तो उसकी जमीन पर उसी ने कब्जा कर लिया था जिसने बिक्री की थी। पीड़िता ने पुलिस को समूची व्यथा सुनाते हुए न्याय की गुहार लगायी। आरोप है कि मौके पर पहुंचे दरोगा अली अख्तर ने जांच के नाम पर पांच सौ रुपये ले लिये लेकिन हिस्ट्रीशीटर और जमीन कब्जा करने वाले से मोटी रकम मिली तो पलट गये। महिला की पिटाई करने के बाद प्रकरण को भूल जाने की हिदायत दी।

डा. लेनिन ने की थी एनएचआरसी से शिकायत

मानवाधिकार जन निगरानी समिति के डा. लेनिन ने समूचे मामले की जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को देने के साथ कार्रवाई के लिए अनुरोध किया था। उन्होंने एनएचआरसी से मांग की थी कि पीडिता के शारीरिक शोषण एवम बेटी के मौत के जिम्मेदार हिस्ट्रीशीटर व उसके अन्य साथियो के संग जमीन पर कब्जा करने वाले के अलावा दोषी पुलिसकर्मियो के खिलाफ कार्यवाही की जाय। साथ ही पीडिता के आजीविका एवम पुनर्वास के लिये प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय अल्पसंख्यक कल्याण योजना से सहायता उपलब्ध करायी जाय।

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जांच में हुई आरोपों की पुष्टि

एनएचआरसी की जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर प्रदेश सरकार को कार्रवाई के आदेश दिये गये। शासन के अनु सचिव ने पीएचक्यू के एडीजी को पत्र भेजा है जिसमें पीड़िता को एक लाख रुपये अंतरिम सहायता के रूप में देने के साथ एस धनराशि की वसूली दोषी पुलिसकर्मियों से करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की गयी है। अगले 10 दिनों में इसकी रसीद एनएचआरसी के साथ शासन को प्रेषित करने की भी हिदायत दी गयी है।

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