न चलेगा ‘सरकार’ ना ही पुलिस और मानवाधिकार, डीएम ने सरकारी वाहनों के ड्राइवरों के लिए दिया यह आदेश

वाराणसी। वाहनों से लाल-नीली बत्ती तो पिछली बार की मोदी सरकार में उतर गयी थी लेकिन इसके बावजूद निजी वाहनों में भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार लिख कर ‘वीआईपी’ बनने के लिए कोशिश जारी थी। डीएम सुरेन्द्र सिंह ने साफ आदेश दिये हैं कि जिन निजी वाहनों में भारत सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार से लेकर पुलिस या मानवाधिकार लिखा मिले उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाये। रांग साइट से निकलने की बढ़ती प्रवृति पर खासी नाराजगी जताते हुए डीएम ने कहा कि ऐसा करते हुए मिलने पर चालान के साथ वाहनों को जब्त किया जाये। साथ ही उन्होंने सरकारी वाहनों को चलाने वालों को भी सीट बेल्ट लगाने के आदेश दिये हैं।

सरकारी ड्राइवरों को मिलेगी प्रतिकूल प्रवृष्टि

सड़क हादसों को लेकर विकास भवन में बुधवार को हुए बैठक में डीएम ने साफ कर दिया है कि जिन सरकारी वाहनों के ड्राइवर सीट बेल्ट लगाये बगैर चलाते मिलेंगे उन्हें पहली दफा तो चेतावनी दी जायेगी और अगली बार प्रतिकूल प्रविष्टि अंकित की जायेगी। सड़कों पर बने स्पीड ब्रेकर का बोर्ड लगाने के साथ उन्हें कलर करने के आदेश दिये गये जिससे अचानक ब्रेक लगाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। इसके अलावा वाहनों पर रिफलेक्टर लगाने पर भी जोर दिया गया।

एचएचएआई और पीडब्ल्यूडी रहे निशाने पर

डीएम के निशाने पर एचएचएआई और पीडब्ल्यूडी विभाग विशेष तौर पर रहे जिन्हें तीन दिनों के भीतर सभी लंबित कार्यो को पूरा करने का टास्ट दिया गया है। चिह्नित सभी ब्लैक स्पाट पर चेतावनी बोर्ड न लगने पर उन्होंने नाराजगी जतायी है। खास यह कि अहम बैठक में एनएचएआई का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था जिस पर डीएम ने स्पष्टीकरण तलब किया है।

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