वाराणसी। आला अफसरों के यहां शिकायती प्रार्थनापत्र देने वाले प्राय: खुद को सही बताते हुए जांच कर कार्रवाई लिखने का अनुरोध करते हैं। अक्सर ऐसा हो भी जाता है लेकिन सोमवार को डीएम सुरेन्द्र सिंह ने प्रार्थनापत्र में दर्शाये गये गलत तथ्यों को पकड़ा तो हत्थे से उखड़ गये। हुआ कुछ यूं कि रायफल क्लब सभागार में जन समस्याओं को सुने जाने के दौरान शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत नामांकन के लिए शिकायत करने पहुंचे आशुतोष कुमार पाण्डेय से उनकी आय पूछी, जो कि अधिनियम के तहत नामांकन की सीमा से अधिक थी। संदेह होने पर डीएम ने तत्काल ही तहसीलदार सदर को उक्त व्यक्ति को निर्गत आय प्रमाणपत्र की जांच करने तथा 19 जुुलाई तक कार्यवाही कर सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दिया। डीएम ने कहा कि यदि उक्त व्यक्ति का आय प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है, तो निर्गत करनेवाले संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए।

बीएसएस से मांगी सूची

डीएम का कहना था कि उचित व्यक्ति को ही शिक्षा के अधिकार अधिनियिम- 2009 के अंतर्गत मिले अधिकार के उपभोग का अवसर प्राप्त हो। अधिनियम का सही उपयोग हो, इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से डीएम ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत नामांकन होने वाले बच्चों की सूची मांगते हुए, इसकी जांच कराने की भी बात कही। उन्होंने प्रमाणपत्र गलत पाए जाने की दशा में एडमिशन और आय प्रमाणपत्र निरस्त किये जाने का आदेश दिया। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आंवटित स्कूल दूर होने की कई अन्य शिकायतों को डीएम ने गंभीरता से लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सही मैपिंग कराए जाने का निर्देश दिया। जिससे बच्चों का आसपास के स्कूल में ही नामांकन सनिश्चित किया जा सके।

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