गाजीपुर। निकाय चुनाव के सियासी बिछात पर चालें चली जाने लगी हैं। विरोधियों को मात देने में जुटे सपा प्रत्याशी प्रेमा सिंह के बेटे शम्मी को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। उन्होंने जिले के कद्दावर नेता अरूण सिंह अपने खेमे में खड़ा कर लिया है। दरअसल बदलते राजनीतिक समीकरण के बीच अरूण सिंह की पत्नी शीला सिंह ने गुरूवार को अपना पर्चा वापस ले लिया। सूत्रों के मुताबिक नैनी जेल में बंद अरूण सिंह ने अपने समर्थकों से प्रेमा सिंह को जिताने की अपील की है।

पर्चा वापसी के पीछे दी गई ये दलील ?

सियासी गलियारे में पर्चा वापसी की वजहों को लेकर पूरे दिन तरह-तरह की चर्चाएं चलती रहीं। कई तरह के कारण गिनाए जाते रहे। इस बीच अरूण सिंह के प्रतिनिधि गौतम सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह बताया है कि सुभाष नगर मोहल्‍ले में उनके शुभचिंतकों की बैठक हुई, जिसकी अध्‍यक्षता वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता रणजीत सिंह ने की। बैठक में सभी शुभचिंतकों ने अपने-अपने विचार प्रस्‍तुत किये जिसमें यह निर्णय लिया गया कि नेताजी अभी जेल में है ऐसे में चुनाव लड़ना उचित नहीं होगा। उनकी गैरमौजूदगी से चुनाव प्रभावित होगा। सर्वसम्‍मत से निर्णय लिया गया कि शीला सिंह चुनाव नहीं लड़ेंगी। हम लोग साम्‍प्रदायिक तत्‍वों के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। इस बीच उनके प्रतिनिधि ने इस ओर इशारा कर दिया है कि अरूण सिंह के समर्थक निकाय चुनाव में स्वजातीय प्रेमा सिंह का समर्थन करेंगे।

क्या है पर्दे के पीछे की असल कहानी ?

अरूण सिंह पिछले तीन दशकों से कांग्रेस और भाजपा की राजनीति कर रहें है। जिले में उनकी गिनती एक दमदार नेता के रूप में होती है। उनके करीबी बताते हैं कि सियासी बिसात पर वो हर चाल बहुत सोच समझकर उठाते हैं। ऐसे में पहले नामांकन और फिर पर्चा वापसी किसी के गले नहीं उतर रही है। ऊपर से उनके प्रतिनिधि की दलील तो और शंका पैदा कर रही है। सवाल इस बात का है कि क्या अरूण सिंह के रणनीतिकारों को ये नहीं मालूम था कि वो इस वक्त जेल में बंद हैं। या फिर इस दलील के पीछे कुछ और रणनीति है, जिसका खुलासा उनके समर्थक नहीं करना चाहते हैं।

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