तीन दिनों से नहीं मिला था खाना लेकिन पैदल हो गये सैकड़ों किलोमीटर रवाना, एसपी चंदौली ने दिखायी ‘दरियादिली’

चंदौली। समूचे विश्व में फैली महामारी कोरोना के चलते देश लॉकडाउन में है। नौकरीपेशा और कारोबार से जुटे लोग तो इसमें किसी तरह जी ले रहे हंै लेकिन असंगिठत क्षेत्र के श्रमिक जो रोजी-रोटी की तलाश में देश के महानगरों में गये थे बेहाल हैै। अचानक हुई घोषणा के बाद न तो उन्हें धन मिल सका न ही लौटने का को साधन। नतीजा, देश के विभिन्न इलाकों से अपने मूल स्थान आने के लिए वह हर संभव प्रयास कर रहे हैं। रेल-बस बंद है तो वह पैदल ही सैकड़ों किलोमाटर की दूरी तक करने चल दिये है। भोजन तो दूर पानी तक नहीं मिल है। कुछ ऐसी ही दास्तान केरल में काम करने वाले 16 मजदूरों की थी जो तीन दिनों से भूखे-प्यासे थे लेकिन कोई विकल्प न होने के कारण पैदल की रेल पटरी के सहारे समस्तीपुर (बिहार) जा रहे थे।

सूचना मिलने के साथ एक्शन में आये कप्तान

मजदूरों का कहना था कि काम की तलाश में वह केरल गये ते लेकिन करोना का संक्रमण फैलने के बाद अचानक सभी ने कन्नी काट ली। ठेकेदार से लेकर सभी अपने घरों में कैद हो गये और मोबाइल बंद हो गया। पल्ले में जो पैसा था उसके सहारे तीन दिनों पहले ही वह वाराणसी पहुंचे लेकिन तभी लॉकडाउन की घोषणा हो गयी। कोई विकल्प नहीं मिला तो भूखे-प्यासे लाचार मजदूर पैदल ही रेल ट्रैक के सहारे बिहार चल दिये। एसपी हेमन्त कुटियाल ने बताया कि उन्हें सूचना मिली कि कुछ लोगों का समूह रेल की पटरियों से होते हुए पैदल ही बिहार की तरफ जा रहा है। इस पर पुलिस ने कुचमन स्टेशन के पास रोककर पूछताछ की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी।

मेडिकल चेकअप और भोजने के बाद लौटने का प्रबंध

मजदूरों का कहना था कि तीन दिन पूर्व वह ट्रेन से झांसी पहुंचे जहां से माल वाहक पिकअप से वाराणसी तक पहुंचे। लॉकडाउन होने की वजहसे आगे नहीं जा सके। तीन दिन तक वाराणसी में फंसे रहने के बाद कोई इंतेजाम न होने पर अपने गन्तव्य हेतु रेल मार्गको सहारा बनाकर उसके किनारे-किनारे भूखे प्यासे ही पैदल चल दिये। पुलिस सभी को सुरक्षित स्थान पर लायी जहां तत्काल नाश्ता व भोजन कराया। इस के बाद मेडिकल मुआयना हुआ जिसमें क्लीनचिट मिली तो वाहन की व्यवस्था कर समस्तीपुर भेजा गया।

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