लखनऊ। पूर्व सांसद धनंजय सिंह की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गयी है। दरअसल बाहुबली मुख्तार अंसारी और उनसे जुड़े लोगों से धनंजय की खींच-तान डेढ़ दशक से चल रही है। इस दौरान उन पर वाराणसी में एके 47 से गोलियां बरसायी गयी थी जिसमें सुरक्षा में तैनात हेड कांस्टेबिल गंभीर रूप से जख्मी हुआ था। खास यह कि धनंजय को इससे पहले जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली थी। केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केन्द्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों के आकलन के बाद इसे परिवर्तित कर वाई किया गया था। पिछले दिनों खुटहन ब्लाक प्रमुख चुनाव को लेकर धनंजय और प्रतापगढ़ के सांंसद हरिबंश सिंह आमने-सामने हो गये थे। जौनपुर पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ मुकदमा कायम किया था।

पहली बार विधायक बने तभी से हैं सुरक्षा

धनंजय सिंह की छवि बाहुबली की रही है जिसके चलते उनके विरोधी भी गिरोहों से जुड़े रहे हैं। मोहम्मदाबाद के भाजपा विधायक स्व. कृष्णानंद राय और मुख्तार अंसारी के बीच लखनऊ कैंटूमेंट में फायरिंग के बाद किसी भाजपाई के बदले सबसे पहले थाने पहुंचने वालों में धनंजय थे। क्रास एफआईआर के बाद वह कृष्णानंद को अपने साथ लेकर गये थे। इसके अलावा फैजाबाद के बाहुबली अभय सिंह से भी उनके 36 के आंकड़े रहे हैं। वाराणसी में जानलेवा हमले के मामले में अभय नामजद हैं और मामला कोर्ट में चल रहा है। इस मामले में धनंजय ने गवाही भी दी है। अभय से मुख्तार से रिश्ते जगजाहिर हैं जिसके चलते धनंजय को 2003 से वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली है।

रिपोर्ट पर तय होगी सुरक्षा

सूत्रों की माने तो खुफिया रिपोर्ट में धनंजय को पूर्वांचल में सर्वाधिक असुरक्षित घोषित करते हुए उनकी सुरक्षा चाक-चौबंद रखने की संस्तु्ति की गयी थी। इसका बराबर तीन माह के अंतराल पर पर्यवेक्षण होता है। यही कारण है कि पिछले 16 वर्षों से सुरक्षा बरकरार रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल पीआईएल पर चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने केन्द्र और राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि धनंजय की सुरक्षा बरकार रहेगी या इसमें कोई परिवर्तन होगा।

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