वाराणसी। तीन दशक पहले अधिकारी के आवास पर उसे रिश्वत देने के प्रयास के एक पुराने मामले में सोमवार को प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह अपना बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट पहुंचे। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) दिवाकर प्रसाद चतुवेर्दी की अदालत में लंबित इस मुकदमे में डीजीपी ओपी सिंह का बयान दर्ज किया गया। जिसमे उन्होंने अभियोजन कथानक का समर्थन करते हुए घटना के समय मौजूद रहने की बात कही। बयान दर्ज होने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह किया। बयान व जिरह की कारवाई पूर्ण होने के बाद अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तिथि 31 मई नियत कर दी।

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20 साल से किया जा रहा था तलब

अभियोजन पक्ष के मुताबिक सुरियावां (भदोही) थाना क्षेत्र के महुआपुर गांव निवासी लालचंद उपाध्याय व सुरेश चंद्र उपाध्याय ने जमीन से संबंधित एक मामले में 13 फरवरी 1987 को उप संचालक चकबन्दी आरके दूबे के सरकारी आवास पर रिश्वत देने का प्रयास कर रहे थे। उसी वक्त तत्कालीन एसपी सिटी व वर्तमान में डीजीपी ओपी सिंह भी मौके पर मौजूद थे। उक्त चकबंदी अधिकारी आरके दूबे ने रिश्वत देने का प्रयास कर रहे दोनों लोगों को एसपी सिटी के ड्राइवर से गिरफ्तार करवा कर पुलिस के हवाले करा दिया। दोनों आरोपी उपसंचालक चकबंदी अधिकारी को चार हजार रुपए देने के लिए उनके आवास पहुंचे थे। उपसंचालक चकबंदी की तहरीर पर दोनों के खिलाफ कैंट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया। कैंट पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ विवेचना पूरी कर 30 मई 1988 को अदालत में आरोप पत्र प्रेषित कर दी। आरोप पत्र में वादी आरके दूबे व ओपी सिंह समेत 10 गवाहों के नाम शामिल हैं। वर्ष 1998 में आरोपियों पर अदालत द्वारा आरोप निर्धारित होने के पश्चात गवाहों को हाजिर होने के लिए लगातार सम्मन जारी किए जा रहे थे लेकिन अभी तक कोई भी गवाह अदालत में हाजिर नहीं हुए थे। डीजीपी को भी हाजिर होने के लिए अदालत द्वारा मुकदमे की कई तिथियों से सम्मन जारी किया जा रहा था। इसी मामले में सोमवार को डीजीपी अपना बयान दर्ज कराने के लिए अदालत में पहुंचे थे।

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