वाराणसी। पिछले दिनों हुए निकाय चुनाव में नगरपालिका रामनगर में निर्दल प्रत्याशी के रूप में रेखा शर्मा ने भले ही चुनाव जीत लिया लेकिन उनकी आगे की राह आसान नहीं दिख रही है। नाटकीय घटनाक्रम के तहत बुधवार को रेखा शर्मा के कांग्रेस में दोबारा शामिल होना ‘मजबूरी का सौदा’ कहा जा रहा है। रेखा शर्मा की ‘घर वापसी’ के पीछे शनिवार को होने वाली बोर्ड की पहली बैठक है। चेयरमैन की कुर्सी भले निर्दल मिल गयी हो लेकिन एक भी सभासद न होने की दशा में किसी न किसी का साथ लेना तो तय था। उधर रेखा से चुनावी अखाड़े में मिली मात के बाज सभी राजनैतिक दलों के सभासद हिसाब चुकता करने के मूड में दिख रहे हैं। रेखा के सामने समस्या यह है कि कांगे्रस के टिकट पर जीतने वाले भी किसी न किसी धड़े से जुडे हैं जो ताजा घटनाक्रम के बाद खुन्नस में दिख रहे हैं।

ईओ के खिलाफ धरने से दिख गयी बानगी

रेखा शर्मा का कार्यकाल कैसा चलेगा इसके संकेत पिछले दिनों पालिका के सामने हुए धरने से मिल चुके हैं। लगभग डेढ़ दर्जन सभासदों ने धरना-प्रदर्शन कर अपने तेवर दिखा दिये। कहने को तो विरोध अधिशासी अधिकारी का था लेकिन निशाने पर चेयरमैन थीं। उनके इशारे पर खास इलाकों में लकड़ी गिरा कर अलाव की व्यवस्था को लेकर सभी लामबंद दिखे। निर्दल प्रत्याशी को अपने दल में शामिल न करने पाने सर्वाधिक खुन्नस भाजपा की है। प्रदेश सरकार में जिले से मंत्रियों के अलावा पीएम मोदी यहीं के सांसद हैं। भाजपा काशी प्रान्त के क्षेत्रीय अध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य भी रामनगर रहते हैं।

निर्दल के समीकरण से नहीं पार होगी नैया

बोर्ड की शनिवार को होने बैठक से पहले सभासदो को साधने का खेल शुरू हो चुका है। कुल 25 सभासदो सर्वाधिक 9 सभासद भाजपा से हैं तो 5-5 सभासद कांग्रेस और सपा के खेमे में हंै। शेष बचे 6 निर्दल सभासदों में तीन का भाजपा में जाना तय हो चुका है और औपचारिक घोषणा बाकी है। पिछली बार सर्वाधिक संख्या सपा की थी लेकिन पार्टी सिंबल के बजाय निर्दल जीत हासिल करने के चलते चेयरमैन उन्हें साधने में सफल रही। काग्रेंस के पास पिछली बार भी चार सभासद थे लेकिन निर्दलों का खुल कर समर्थन था। फिलहाल सभासदो की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बोर्ड का शांतिपूर्ण ढंग से चल पाना नामुमकिन दिखाई दे रहा हैं।

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