डिप्टी सीएम का बेटा बन कप्तान से कोतवाल तक बनाया ‘भौकाल’, उगाही की पोल खुली तो अंदर हवालात

मीरजापुर। पिछले कुछ समय से जिले के एसपी से लेकर विभिन्न थानों के प्रभारियों के यहां एक ऐसा फोन अता था जिसे सुनकर वह दबाव में आ जाते थे। कॉल करने वाला खुद को प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या का पुत्र आशीष बताते हुए अनुचित काम का दबाव बनाता था। धड़का कुछ ऐसा खुला कि वह लोगों से काम कराने के एवज में मोटी रकम तक वसूलने लगा। ऐसे ही एक मामले की शिकायत आला अधिकारियों को मिली तो इसकी जांच के अदेश दिये गये। जांच में स्पष्ट हुअ कि फोन करने वाला कोई और नहीं बल्कि गोधना गांव (कछवां) निवासी दिनेश मौर्या है। फौरन ही तहरीर लेने के साथ थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह ने मुकदमा कायम करने के साथ गिरफ्तार कर लिया। दिनेश के खिलाफ आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं जिसमें अधिकांश धन उगाही संबंधी हैं।

कप्तान को फोनकर मांगा कोतवाल का नंबर

बताया जाता है कि दिनेश का तेवर कुछ ऐसा हो चुका था कि वह किसी को फोन कर धमकाने में पीछे नहीं रहता। हद तो तब हो गयी जब उसने एसपी को भी फोन कर दबाव में लेने की कोशिश की। इसी दौरान उसने थाना के सीयूजी नम्बर पर भी फोन कर डिप्टी सीएम का बेटा बनकर एक मामले का पैरवी शुरू कर दी। दिनेश सेमरी मदरसा के रहने वाले संग्राम विश्वनाथ से भी नौकरी दिलाने के नाम पर 1.5 लांख रूपये लिये था। पुलिस से शिकायत पर जब जांच शुरू हुयी तो पर्त दर पर्त मामलो का खुलासा होने लगा। पीएम-सीएम आवास, शौचालय, हैण्डपम्प आदि दिलाने के नाम पर भी कईयों से रुपए ऐंठे है।

पैरवीकारों को मिली फटकार

दिनेश फर्जीवाड़े के साथ पूर्व में चोरी के एक मामले में जेल भी जा चूका है। शातिर आरोपित के खिलाफ आधा दर्जन विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया। खास यह कि दिनेश के पकड़े जाने की जानकारी पर उसकी पैरवी में आए थाने आये एक वकील साहब को भी पुलिस की खरी खोटी सुननी पड़ी। साथ ही एक सफाई कर्मी भी बगैर इजाजत के मोबाईल पर वह लाकअप के पास जाकर बात करना चाहता था जिसे डांटकर पुलिस ने हिरासत मे ले लिया। फर्जीवाड़े में गिरफ्तारी का यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है।

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