वाराणसी। जिला प्रशासन की भू माफिया की सूची में पहला स्थान पाने वाले दीपक मधोक के पुराने मामलों की फाइलें खुलने लगी है। शुक्रवार को पुलिस ने पुराने मामलों की नये सिरे से रिपोर्ट तैयार की है। फर्जीवाड़े के मामलों जिन मामलों को पुन: विवेचना के नाम पर अटका कर रखा था उसमें जल्द कारवाई के आदेश दिये गये हैं। इसे अलावा रोहनिया और भेलूपुर के मामलों को लेकर भी निर्देश दिये गये हैं। सूत्रों की माने तो मामला शासन के संज्ञान में आ चुका है और सरकारी भूमि पर कब्जा करने के बावजूद आंख तरेरने को गंभीरता से लिया गया है। तालाब पर कब्जे के मामले में हाईकोर्ट से निर्देश आ चुके हैं और माना जा रहा है कि जल्द ही बुलडोजर इसे हटाने के लिए पहुंचेगा।
योगी के निर्देश प्रभावी होंगे या मामला फिर ठंडे बस्ते में
सीएम योगी ने तीन दिन पहले वीडियो कांफ्रेसिंग में स्पष्ट कर दिया था कि भू माफिया के खिलाफ कार्रवाई के क्रम में उन्हें पहले रखा जाये जो कब्जा करने के आदी है और राजनैतिक सम्पर्को का लाभ उटाते हैं। मधोक के खिलाफ मामले पहले भी उठते रहे हैं लेकिन उनकी पकड़ का नतीजा रहता है कि कुछ समय के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। वरुणा के पास नाले की जमीन पर निर्माण के मामले की फाइल काफी समय से एसीएम चतुर्थ के यहां अटकी है। इस पर कोई निर्णय लेने की हिम्मत जब तक जुटाता है दूसरे स्थान पर तबादला हो जाता है। देखना है कि योगी के निर्देश प्रभावी होते हैं या एक बार मधोक का तिलिस्मि कायम रहता है।
तालाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की है गाइड लाइन
कुछ इसी तरह लहरतारा का मामला है। राजस्व रिकार्ड में भूमि तालाब थी जिसकी नवैयत बदली गयी। सुप्रीम कोर्ट ने हिंचलाल गौड मामले में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किये हैं कि तालाब की नवैयत बदली गयी तो इसे पूर्व रूप में लाया जाये। राजस्व सूत्रों का कहना है कि लहरतारा के मामले में हाइकोर्ट से भी आदेश हो चुका है। सिर्फ इसका अनुपालन करान ेके लिए सख्त और तेज-तर्रार अधिकारी की जरूरत है।

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