शिल्प बाजार 2019 का हुआ आगाज, कुल 18 प्रदेशों के 375 पुरस्कार प्राप्त शिल्पकार इसमें शामिल

वाराणसी। काशी बहुत ही बड़ा शिल्प का केंद्र है। बनारसी साड़ी, मीनाकारी, पीतल एवं लकड़ी के सामान आदि काशी के अमूल्य धरोहर है। प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. नीलकंठ तिवारी ने शनिवार को गांधी शिल्प मेले का उद्घाटन करते हुए जोर देकर कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा हर जिलों के वहां के प्रमुख उत्पादों को प्रमोट करके उस व्यवसाय से जुड़े लोगों के स्वावलंबन के लिए एक जनपद एक उत्पाद योजना लागू की गई है। उन्होंने बताया कि काशी गंगा महोत्सव के दौरान आयोजित 10 दिवसीय गांधी शिल्प बाजार में देश के कोने कोने से और विभिन्न प्रदेशों से शिल्पकार अपने-अपने उत्पादों को लेकर के लिए यहां आते हैं। यह गांधी शिल्प बाजार शिल्पीयों एवं उद्यमियों को अपने उत्पादों को बेचने का एक अच्छा प्लेटफार्म है। स्थानीय लोगों को भी एक ही स्थान पर विभिन्न प्रदेशों के उत्पाद एवं उचित मूल्यों पर गुणवत्ता के साथ प्राप्त हो जाते हैं।

18 नवंबर तक 1 बजे से रात्रि 9 बजे तक मेला रहेगा

इस वर्ष मेले में 18 प्रदेशो के 375 अनेक पुरष्कार प्राप्त शिल्पियों द्वारा प्रतिभाग किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से आसाम ,बंगाल ,कश्मीर ,त्रिपुरा झारखंड ,मणिपुर इत्यादि के हस्तशिल्पी है। इनके द्वारा धातुशिल्प , पैचवर्क ,चर्मशिल्प ,जूटक्राफ्ट, जरिक्राफ्त ,वुड ,ज्वैलरी आदि प्रदर्शन किया जा रहा है। स्वादिस्ट व्यंजनों के भी स्टाल लगे है। उदघाटन अवसर पर पर्यटन, स्वास्थ नाबार्ड इत्यादि के अधिकारी भी उपस्थित थे।

आकर्षण के केन्द्र मिट्टी का फ्रिज

शिल्प मेले में इस बार टेरीकोटा के बर्तन ही नहीं बल्कि मिट्टी का बना फ्रिज तक उपलब्ध है जो लोगों के आकर्षण का केन्द्र बना है। इसके अलावा मिट्टी का प्रेशर कूकर, हांडी से लेकर वाटर बाटर तक उपलब्ध है। खास यह कि इनका उपयोग एक नहीं बल्कि अनेकों बार किया जाये तो भी खराब नहीं होते। शिल्प मेले में पहली बार इसका स्टाल लगाने वाले शरद का कहना है कि लोगों को इनकी कीमत सुनकर विश्वास ही नहीं होता कि इतनी बेहतर वस्तु इतने कम दाम में मिल सकती है।

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