पूर्व सांसद धनंजय के लिए गले की ‘फांस’ बना गोपनीय पत्र, सुरक्षा मिलना तो दूर रपट दर्ज करने की तैयारी

लखनऊ। लंबे समय तक बगैर जनप्रतिनिधि रहे पूर्व सांसद धनंजय सिंह अत्याधुनिक असलहों से लैस सीपीएमएफ के जवानों के घेरे में रहते थे। जहां दूसरे सांसद-विधायक से लेकर मंत्री तक अपने साथ चलने वाले गनर पर निर्भर रहते वहीं धनंजय का ‘भौकाल’ टाइट रहता। अरसे तक मिलने वाली सुरक्षा पिछले साल अचानक उस समय छिन गयी जब इसे लेकर हाइकोर्ट में एक याचिका दायर की गयी। हाइकोर्ट में सुनवाई से पहले ही सरकार ने सुरक्षा वापस लेने के साथ उत्तर हाइकोर्ट में दाखिल कर दिया। वर्षों तक सुरक्षा के आवरण में रहे धनजंय के लिए यह बड़ा झटका था। इसे दोबारा हासिल करने के लिए हाइकोर्ट में यखिल की गयी रिट याचिका अब गले का फांस बन गयी है।

गोपनीय पत्र को किया था दााखिल

दरअसल पूर्व सांसद की तरफ से अपनी सुरक्षा की बहाली की गुहार लगााने के संग एक पत्र संलग्न किया था जो एसटीएफ की तरफ से जारी था लेकिन गोपनीय था। एसटीएफ ने यह इंटलिजेंस मुख्यालय को भेजा था लेकिन यह धनंजय के पास पहुंच गया। कोर्ट ने सुरक्षा से जुड़े गोपनीय पत्र के लीक होने को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के आदेश दिये थे। पहले तो डीजीपी मुख्यालय ने अपन तरफ से जांच का कोरम पूरा किया जो बेनतीजा रहा। इसके बाद हाइकोर्ट के आदेश पर जांच एलआईटी को सौंप दी गयी। हाइकोर्ट पत्र की हकीकत के संग यह जानना चाहता था कि यह धनंजय के हाथों तक कैसे पहुंचा जहां से कोर्ट में गोपनीय रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया।

बदलते बयान से पनपे सवाल तमाम

एसआईटी ने धनंजय से इस बाबत पूछताछ की तो पहली बार उनका कहना था कि कोई अंजान व्यक्ति दे गया था। मामला फंसते देख दूसरी बार में कहा कि कोई मीडियाकर्मी दे गया था। मीडियाकर्मी तक एसआईटी पहुंची तो उसका कहना था कि कोई कार्यालय में छोड़ गया था। शासन के निर्देश पर एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट हाइकोर्ट में दाखिल कर दी। एसआईटी के प्रमुख डीजी आरपी सिंह का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने धनंजय के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर विवेचना के आदेश दिये हैं। कुल मिला कर सुरक्षा मिलना तो दूर पूर्व सांसद के आपराधिक इतिहास में एक और मामला बढ़ने जा रहा है।

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