शिकायतकर्ता का आरोप: पांच क्रेशर तो नमूने मात्र, जिले में ऐसे हैं सैकड़ो मामले

सोनभद्र। पिछले कई दशकों से अवैध खनन खुला खेल चल रहा था लेकिन पहली बार एनजीटी ने इस तरह सख्त रुख अख्तियार करते हुए कार्रवाई के आदेश दिये हैं। इसकी भनक मिलने के बाद से खनन करने वालों के होश फाख्ता हैं। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में दर्शाया है कि जनपद के खोखा,बरहमोरी, हर्रा तथा खेबंधा स्थित नदी तलों पर भी बरहमोरी और हर्रा में नदी में अस्थाई पुल का निर्माण किया गया है। इसके चलते खोखा और खेबंधा में सम्पर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं। खनन तो भारी मात्रा में किया गया लेकिन इसके साथ पर्यावरण सम्बंधी मानकों का पालन नहीं किया गया और सामाजिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया। पर्यावरण सम्बंधी अनापत्ति की कई शर्तों का पालन नहीं किया गया। प्रकरण में वादी चौधरी यशवंत सिंह ने कहाकि यह तो मात्र कुछ नमूने हैं जबकि सोनभद्र में सैकड़ों मामले इस प्रकार के हैं। भविष्य उन्हें भी सही मंच पर उठाया जाएगा।

क्षतिपूर्ति वसूली की योजना बनेगी

एनजीटी ने अपने आदेश में अग्रिम योजना एवं मापदंड बनाने हेतु भी कहा गया है जिससे पर्यावरणीय सुधार के साथ ही क्षति पूर्ति की वसूली हो सके। इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व डीएम सोनभद्र की संयुक्त कमेटी का गठन किया जाय। कमेटी द्वारा एक माह में योजना बनाकर ट्रिब्यूनल के साथ ही मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन को सूचित करने का आदेश दिया एवं प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसका नोडल एजेंसी बनाते हुए अनुपालन और समन्वय की जिÞम्मेदारी सौंपी गयी है। यह भी कहा है कि उक्त योजना का क्रियान्वयन दो माह के अंदर किया जाय। इसमें मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश भी उक्त योजना के क्रियान्वयन के तरीकों और क्रियान्वयन पर अपनी निगाह रखते हुए जांच रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष ई मेल द्वारा प्रेषित करेंगे। साथ ही प्रदेश का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी कार्यवाही रिपोर्ट प्रेषित करेगा।

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