वाराणसी। बिजली के जर्जर और ढीले तार आये दिन टूटते हैं जिसकी चपेट में अकर मौत तक हो जाती है। अमूमन इन मामलों को फौरी तौर पर रफा-दफा कर दिया जाता है। बावजूद इसके पितरकुंडा (सिगरा) में 18 सिंतबर को निजामुद्दीन उर्फ पिंटू (35) की मौत के मामले में एनएचआरसी ने दखल दिया तो बिजवी विभाग को पांच लाख रुपये मुआवजे के रूप देने पड़ा। पीवीसीएचआर की तरफ से डा. लेनिन ने मानवाधिकार आयोग में इसकी शिकायत की थी जिसके बाद यह आदेश हुआ। दरअसल पिंटू रोजाना की तरह अपनी दुकान खोलने के लिए बाहर सफाई कर रहे थे तभी बिजली का तार टूट कर उनके उपर आ गिरा था। बजली विभाग की घोर लापरवाही का जांच के अलावा पीड़ित परिवार को पुनर्वासित करने के लिए मुआवजे की मांग एनएचआरसी ने स्वीकार कर ली।

एनएचआरसी में मामला पहुंचते सक्रिय हुआ विभाग

डा. लेनिन ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर एनएचआरसी में मामले की शिकायत की थी। नोटिस जारी होने के साथ बिजली विभाग सक्रिय हो गया था। मानवाधिकार आयोग ने इस मामले की संज्ञान लिया और यूपी सरकार के प्रमुख सचिव, ऊर्जा विभाग को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही बिजली विभाग सक्रिय हो गया। एनएचआरसी को सूचना दी गयी कि परिजनों को चेक के रूप में पांच लाख की धनराशि देने के साथ अनुशासनात्मक कार्यवाही भी दोषी अधिकारियों के खिलाफ ली गई थी। आयोग ने माना कि संबंधित राज्य अधिकारियों ने मृतक के परिजनों के लिए मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये का भुगतान किया और कानून के अनुसार भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। इन परिस्थितियों में आयोग के आगे हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। शिकायतकर्ता डा. लेनिन को इसकी सूचना देने के साथ प्रकरण का निस्तारण कर दिया गया।

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