सीएम योगी की सफाई: पूरी ‘खिचड़ी’ कांग्रेस के जमाने में ‘पकायी-खायी’तो कैसे दे ‘सफाई’, कार्रवाई के क्रम में कई नपे

लखनऊ। घोरावल (सोनभद्र) में भूमि विवाद को लेकर आदिवासियों की सामूहिक हत्या शासन के लिए गले का फांस बनती जा रही है। लोकसभा चुनावों में प्रचंड जीत का खुमार उतरा भी न था कि समूचा विपक्ष इस प्रकरण को लेकर लामबंद हो गया है। खास यह कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर खासी आक्रमक हैै जबकि सीएम ने अपनी तरफ से उसे घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सीएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके न सिर्फ पक्ष रखा बल्कि इसकी खातिर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके साथ कार्रवाई का चाबुक चलाते हुए सीएम ने गोली कांड की आरम्भिक जांच में दोषी एसडीएम,सीओ सहित कोतवाल से लेकर हत्का दरोगा और सिपाही तक को निलंबित कर दिया है। प्रमुख सचिव और एडीजी वाराणसी को जांच अधिकारी भी नियुक्त करते हुए 10 दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।

फर्जीवाड़ा कांग्रेस के शासनकाल की देन

सीएम ने मीडिया के सामने सिलसिलेवार ढंग से जानकारी रखते हुए दावा किया कि जिस जमीन को लेकर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया उसे 1955 में तहसीलदार रावर्ट्सगंज ने ग्राम समाज की जमीन को आदर्श कॉपरेटिव सोसाइटी के नाम कर दिया था। उस समय कांग्रेस की सरकार थी। यही नहीं 1989 को दो प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने और परिजनों के नाम से कूट रचित ढंग से जमीन को नाम ट्रांसफर करा लिया गया। इस समय भी सूबे में कांग्रेस की ही सरकार थी। इन्हीं दोनों अधिकारियों के द्वारा 17 अक्टूबर 2017 जमीन ग्राम प्रधान को बैनामा कर दिया जिसकी दाखिल खारिज 6 फरवरी 2019 में हुई है। इस पूरे मामले में जो भी अधिकारी,कर्मचारी दोषी पाए जायेगे,किसी को बक्शा नहीं जाएगा।साथ ही एसओ, एसडीएम समेत सीओ को निलंबित कर दिया गया।

जांच की आंच में झुसल सकते हैं कई बड़े ‘नाम’

अब तक तो मामला सौ एकड़ भूमि का चल रहा था लेकिन जांच की आंच में सिर्फ दो आला अधिकारी ही नहीं बल्कि उनके आदेश पर हेराफेरी करने वाले कई दूसरे भी दायरे में आ सकते हैं। सोनभद्र में तैनात रहे कई दूसरे अफसरों की भूमिका भी सवालों के दायरे में है जिनसे शिकायत के बाद भी प्रकरण को दबाते हुए कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी। शुरूआत तो एसडीएम और सीओ से हुई है लेकिन तय है कि आईएएस-आईपीएस स्तर के अधिकारी भी चपेटे में अ सकते हैं।

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