‘दावे’ तमाम लेकिन हकीकत से गठबंंधन के नेता नहीं ‘अनजान’, भाजपा पर दिये वहीं ‘घिसे-पिटे’ बयान

गाजीपुर। लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण की वोटिंग में एक सप्ताह से कम समय शेष है और अंतिम दौर का मतदान पूर्वांचल में हो रहा है। यही कारण है कि केन्द्र और प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा और प्रमुख प्रतिद्वंदी सपा-बसपा गठबंधन की रैलियां एक-दो दिन के अंतराल पर हर स्थान पर हो रही है। पीएम मोदी ने यहां पहले सभा की थी और सोमवार को बसपा सुप्रीमो मायावती के संग सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रत्याशी अफजाल अंसारी के लिए माहौल बनाने पहुंचे थे। गठबंधन के नेताओं के दावा था कि भीड़ दो लाख से अधिक थी लेकिन जानकारों का कहना था कि 70 हजार से अधिक नहीं थे। कमोवेश इतने ही पीएम के कार्यक्रम में भी पहुंचे थे। यह बात दीगर है कि गठबंधन के नेताओं के तरकश के तीर खत्म हो चुके हैं और पुराने बयानों को दोहराया जा रहा है।

अब गठबंधन को लेकर दे रहे हैं सफाई

दरअसल पीएम मोदी ने 23 मई को गठबंधन को खत्म होने की तारिख बतायी तो मायावती ने इसे लेकर सफाई दी। दावा किया कि कितने भी हथकंडे अपना लो लेकिन यह टूटेगा नहीं। अलबत्ता चुनौती देने के क्रम में कहा कि सरकार जाने की आशंका से बीजेपी घबरायी है क्योंकि इनके बुरे दिन शुरू होने वाले हैं। केन्द्र की सरकार जाते ही योगी भी मठ में पहुंच जायेंगे। अपनी हालत खराब देख गठबंधन पर आरोप लगाये जा रहे हैं। मोदी के बाद योगी को उखाड़ फेंकने तक यह जारी रहेगा। इसे चाहे सांप-नेवला कहे या महामिलावटी लेकिन दाल गलने वाली नहीं है।

अखिलेश के भी रहे पुराने स्वर

मायावती के बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने सभा को संबोधित किया लेकिन वही पुराने आरोप और वादे दोहराये। अलवत्ता गाजीपुर से समूचे देश में सर्वाधिक सेना और पुलिस की भर्ती को देखते हुए यह कहने से नहीं चूके कि जैसे प्रदेश में सिपाही के लिए भर्ती में ‘परीक्षा’ खत्म कर दी वैसे ही केन्द्र की सरकार बनी तो सेना और दूसरी फोर्स में भी कर देंगे। भाजरपा की तरह पकौड़े बेचने की सीख के बजाय रोजगार के लिए यह किया जायेगा।

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