वाराणसी। एमएलसी बृजेश सिंह के संग जिला जज और विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत प्रार्थनापत्र पर आख्या मंगाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को इस मामले की कचहरी परिसर में खासी खलबली रही। एक तरफ तो सेन्ट्रल बार और दि बनारस बार की संयुक्त बैठक में सीजेएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया गया तो दूसरी तरफ जिला जज को प्रतिवेदन देकर कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। सूत्रों की माने तो सीजेएम आफिस के दो लिपिक समेत एक अन्य कर्मचारी को इस मामले में निलंबित किया जा चुका है। बहरहाल इस मामले में कोई खुल कर बोलने के लिए राजी नहीं हो रहा है लेकिन यह तय है कि कार्रवाई की आंच में कई और भी झुलस सकते हैं। मामला तूल पकड़ने के बाद सीजेएम ने जिला जज को रिपोर्ट भेजी है की प्रार्थनापत्र उनके विश्राम कक्ष में रखा था और अपूर्ण आदेश युक्त। प्रकरण की जांच एडीजे (चतुर्थ ) डॉ ए के सिंह को सौंपी गयी है, जो एक माह में अपनी रोपोर्ट जिला जज को देंगे।

क्या था पूरा मामला

बहुचर्चित सिकरौरा कांड की गवाह हीरावती के पुत्र दिनेश कुमार यादव ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था। दिनेश ने दाखिल वाद में आरोपित बृजेश सिंह के अलावा इस मामले की सुनवाई कर रहे पीठासीन अधिकारी पर संगीन आरोप लगाये थे। साथ ही यह भी आरोप था कि इसकी शिकायत जिला जज से की गयी तो उन्‍होंने भी इसपर गंभीरता से विचार नहीं किया। दिनेश ने सीजेएम की अदालत से मांग की है कि उपरोक्‍त लोगों के खिलाफ आपराधिक अभियोग पंजीकृत कर विवेचना करने का आदेश पुलिस को दिया जाए। सीजेएम ने इस पर पुलिस से आख्या मांग ली।

लंबे समय के बाद दिखी लामबंदी

कैंट पुलिस के पास आदेश बुधवार की देर शाम पहुंचा तो वह पसोपेश में पड़ गयी। दूसरी तरफ न्यायिक अधिकारियों से लेकर वकील तक इसकी जानकारी मिलने के बाद हैरत में रह गये। लंबे समय के बाद बार और बेंच किसी मुद्दे को लेकर लामबंद दिख रही है। माना जा रहा है कि अधिकार क्षेत्र से हट तक इस प्रार्थनापत्र पर आख्या तलब की गयी है।

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