सहारनपुर से मिले संकेत के बाद चंद्रशेखर ने खींचे पैर! दलित वोटों में बिखराव के लिए कांग्रेस का खाली गया ‘वार’

लखनऊ। भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर की पहचान सहारनपुर मंडल और इससे समीपवर्ती इलाकों में रही है। उनको पिछले दिनों चर्चा में लाने वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी थी। मेरठ जाकर उन्होंने न सिर्फ चंद्रशेखर से मुलाकात की बल्कि उन्हें दलितों की आवाज करार दिया। बसपा सुप्रीमो मायावती इससे भड़क गयी और पलटवार करने में देरी नहीं लगायी। सहारनपुर में चुनाव पहले चरण में हो चुका है। इससे पहले भीम आर्मी ने खुल कर कांग्रेस के समर्थन का ऐलान किया। माना जा रहा है कि वेटिंग के बाद मिले संकेतों से चंद्रशेखर ने यू टर्न ले लिया है। अब बिना मांगे न सिर्फ गठबंधन का समर्थन किया बल्कि मायावती को पीएम बनाने की बात करने लगे।

दलित वोटों में मानी जाती है पकड़

चंद्रशेखर दलितों के नेता हैं और इस वोट बैंक में किसी दूसरे की पहुंच बसपा सुप्रीमो मायावती को बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने चंद्रशेखर को न सिर्फ भाजपा का एजेंट करार दिया बल्कि दलितों के वोटों में बंटवरा कराने वाला तक कहा। चंद्रशेखर ने भी पलटवार करते हुए कहा था कि पार्टी सतीशचंद्र मिश्र के इशारे पर चल रही है। दलितों का वोट लेकर जो दूसरों को प्रमोट किया जा रहा है वह कहा तक उचित है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच पहले चरण की वोटिंग हो गयी और गुरुवार को दूसरे दौर का मतदान होना है। इससे पहले चंद्रशेखर को संकेत मिले उनकी छवि खराब हो रही है और उन्हें लेकर मायावती के बयानों को गंभीरता से लिया जा रहा है। इसके बाद वह बैकफुट पर दिख रहे हैं।

काशी में भी नहीं जुटा सके थे भीड़

प्रियंका से मुलाकात के बाद चंद्रशेखर के हौसले कुछ इस कदर बुलंद थे कि उन्होंने काशी में पीएम मोदी को चुनौती देने तक का एलान कर दिया था। यह बात दीगर है कि यहां आकर रोड शो करने पर उन्हें जमीनी हकीकत का एहसास हो गया। तमाम कोशिशों और कई जिलों तक संदेश भेजने पर भी भीड़ नहीं जुट सकी। कांग्रेस का समर्थन उनकी तरफ से हुआ था लेकिन यहां पर कोई कांग्रेसी पास तक नहीं फटका। मायावती के तीखे तेवर भांपकर कांग्रेस ने दूरी बनाने में बेहतरी समझी जिससे चुनाव के बाद गठबंधन की संभावना बरकरार रहे। यही कारण है कि बुधवार को चंद्रशेखर न सिर्फ यू टर्न लिये बल्कि अब सपा-बसपा के कसीदे पढ रहे हैं।

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