चंदौली को लेकर गठबंधन में चल रहा ‘मंथन’, प्रत्याशी नहीं रहा ‘दमदार’ तो इस बार भी हो सकती है हार

चंदौली। लोकसभा चुनावों के दूसरे चरण का मतदान कुछ घंटों के बाद होने वाला है। अंतिम दो चरणों के लिए नामांकन भी आरम्भ हो रहे हैं। बावजूद इसके सपा-बसपा गठबंधन चंदौली सीट के लिए कोई प्रत्याशी नहीं तय कर सका है। दरअसल इस सीट पर पिछली बार बसपा दूसरे नंबर पर थी। उसके प्रत्याशी के रूप में अनिल मौर्या ने भाजपा उम्मीद्वार डा. महेन्द्रनाथ पाण्डेय को कांटे की टक्कर दी थी। अनिल मौर्या भाजपा में शामिल होने के साथ सोनभद्र से विधायक बन चुके हैं। सीट सपा के कोटे में गयी है लेकिन वहां से प्रत्याशी के रूप में कोई सर्वमान्य नाम नहीं सामने आ रहा है। जो दावा कर रहे हैं उनका विरोधी खेमा ठम ठोंक रहा है कि इनके टिकट मिलने पर खुलकर विरोध करेंगे।

जातीय समीकरण भी नहीं दे रहे साथ

चंदौली में मौर्या-कुशवाहा वोटर बड़ी संख्या में हैं जिनके बूते पिछली बसपा ने ढाई लाख से अधिक वोट प्राप्त किये थे। इन आंकड़ों का ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने एनएचआरएम घोटाले के आरोपित और लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहे जन अधिकार पार्टी के मुखिया बाबू सिंह कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या को मैदान में उतारा है। शिवकन्या ने पिछला चुनाव गाजीपुर से लड़ा था और मनोज सिन्हा को कांटे की टक्कर दी थी। सवर्ण वोट परम्परागत रूप से भाजपा के साथ रहता है। दलित प्रत्याशी अपने दम पर चुनाव नहीं जीत सकता। इन्हीं समीकरणों को देखते हुए किसी ‘दमदार’ प्रत्याशी की तलाश चल रही है।

क्षेत्र से हो भिज्ञ, नाम से हो पहचान

सपा को एहसास है कि वोटिंग में एक माह से कम का समय बचा है। ऐसे में नया नवेला उम्मीद्वार क्षेत्र में सम्पर्क करना तो दूर अपना नाम तक नहीं बचा पायेगा। सूत्रों की माने तो पार्टी किसी ऐसे प्रत्याशी को मैदान में उतारना चाहती है जो सर्वमान्य हो और पहले से इलाके में पहचान हो। इसके तहत दूसरे दल के दमदार नेता को अपने सिंबल पर लड़ाया जा सकता है। इसके अलावा समीपवर्ती जनपद के नेता भी अपनी दावेदारी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि टिकट किसी सवर्ण और क्षत्रिय को मिलेगा लेकिन वह कौन होगा यह तय नहीं है।

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