वराणसी। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र का भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी सब्जियों के विभिन्न आयामों पर शोध करने वाला देश का अग्रणी संस्थान है। वर्तमान में संस्थान 42 विभिन्न प्रकार की सब्जियों पर शोध कार्य कर रहा है जिसमें से कई अल्प प्रचलित सब्जियां है। अल्प प्रचलित सब्जियों में पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए पोषण सुरक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण है। इसलिये संस्थान द्वारा इन अल्प प्रचलित सब्जियों के बीजों को किसानों के खेत तक उपलब्ध कराने के लिए शोध कार्य शुरू किया गया। देश में पहली बार बसेला, बथुआ,चौलाई, सफेद बैंगन, काली गाजर, लाल मूली,छप्पन कद्दू एवं सतपुतिया की प्रजातियॉं का विकास किया गया। संस्थान द्वारा विकसित प्रजातियों के अनुमोदन के लिए बैठक 3 अक्टूबर को राज्य स्तरीय बीज उप समिति की बैठक प्रमुख सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में हुई।

बढ़ेगी किसानों का आय

बैठक में अल्प प्रचलित सब्जियों में बसेला की 3, बथुआ की 2 चौलाई, सफेद बैंगन, काली गाजर, लाल मूली, समर स्क्वैश एवं सतपुतिया की 1-1 प्रजातियों का अनुमोदन किया गया। इसके अतिरिक्त लौकी की 3, परवल, भिण्डी,सेम और फ्रेंच बीन की 2-2 एवं फूलगोभी, करेला,तरोई की 1-1 प्रजातियॉं का भी अनुमोदन किया गया। इसी बैठक में संस्थान द्वारा विकसित 6 संकर प्रजातियों जिनमें कुम्हड़ा,खीरा, भिण्डी,तरोई की 1-1 एवं मिर्च की 2 संकर किस्मों का भी अनुमोदन किया गया। संस्थान द्वारा विकसित की गयी संकर प्रजातियों का बीज किसानों को उपलब्ध कराया जायेगा जिससे प्रदेश के किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होगी। संस्थान के निदेशक डा. बिजेन्द्र सिंह के मुताबिक राज्यस्तरीय बीज उप समिति द्वारा इन प्रजातियों के नोटिफिकेशन के लिए केन्द्रीय बीज समिति नई दिल्ली को भेज दिया गया।

admin

No Comments

Leave a Comment