वाराणसी। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, वाराणसी द्वारा जिला प्रशासन वाराणसी के सहयोग से इस बार स्वतंंत्रता दिवस पर चार दिवसीय ‘जश्न ए आजादी’ कार्यक्रम होगा। टाउन हॉल के सभागार में रविवार को इसका शुभारंभ डीएम सुरेंद्र सिंह एवं एडीएम नागरिक आपूर्ति श्रीराम सिंह तथा एचडीएफसी बैंक के क्लस्टर हेड मनीष टंडन तथा कलाकारों द्वारा दीप आलोकन द्वारा हुआ। स्वागत करते हुए क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी के प्रभारी एवं उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के सचिव डा. यशवन्त सिंह राठौर ने कहा की इस वर्ष से जश्न ए आजादी के आयोजन को एक दिवसीय से चार दिवसीय स्वरूप डीएम के परामर्श एवं सहयोग से ही प्राप्त हो पाया है जो कि इस राष्ट्रीय पर्व की महत्ता के अनुरूप है। कार्यक्रम में राष्ट्रगान के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम आरम्भ हुआ।

अगली पीढ़ी को याद दिलाते हैं स्वतंंत्रता सेनानियों की

इससे पूर्व डीएम ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन के माध्यम से न केवल हम इस राष्टीय पर्व को सोल्लास मनाते है बल्कि अगली पीढ़ी के बालकों तथा बालिकाओं को भी स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग का स्मरण कराते है जो कि सर्वथा आवश्यक है। डीएम ने कलाकारों का भी माल्यार्पण भी किया। प्रथम प्रस्तुति रही यथार्थ क्रिएशन के अंतर्गत शुभ्रा वर्मा द्वारा निर्देशित नाटक की जिसका नाम था ‘हमारा गौरव हमारा इतिहास रानी लक्ष्मीबाई’। मुख्य भूमिका थी सूत्रधार मंजूषा अभिषेक मनु बाल रूप में वर्षा राय रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका में दीक्षा मौर्य भागिरथी की भमिका मे ज्योति मोरोपन्त सोनू बाजीराव में अभिषेक गंगाधर राव में तुषार नाना साहेब में आकाश वर्मा तात्याटोपे में गोविंदा। नाटक के अंत मे डीएम ने इसके मंचन को को अमर सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया और कलाकारों के जीवंत अभिनय के लिए सराहना की। अगली प्रस्तुति रही तरुण वादक कलाकार वेदांत सिंह के स्वतंत्र तबला वादन की। अंतिम प्रस्तुति रही युवा गायक हिमांशु दुबे की इनके साथ तबला संगति रही अखिलेन्द्र मिश्र की एवं हारमोनीयम पर साथ दिया सूरजप्रकाश चक्रवाल ने। देशभक्ति गीतों और कजरी के गायन से सबको आनंदित किया कजरी के बोल थे छाई नभ में बदरिया कारी। इस अवसर पर यश भारती से अलंकृत लोक गायक विष्णु यादव जी एवं अजय गुप्ता शहनाई वादक कलाकार मोहनलाल संजय सिंह आदि उपस्थित रहे आयोजन में। प्रमुख सहयोग रहा अतुल सिंह का तथा कार्यक्रम का कुशल संचालन डा. प्रीतेश आचार्य ने किया।

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