वाराणसी। डीरेका में दशकों से ‘नेताजी’ के नाम पर चल रही वसूली की भनक पुलिस को थी लेकिन मामला रेल मंत्रालय का होने के नाते इस पर ध्यान नहीं दिया जाता था। न कोई शिकायत करने वाला था और न ही वहां के प्रशासन की तरफ से कोई आपत्ति थी। कर्मचारी नेता ताराधीश कुमार मुकेश की हत्या के बाद पुलिस ने परते खोलनी शुरू की तो चौंकाने वाले खुलासे होने लगे। पता चला एक ही नहीं बल्कि कई माफिया गिरोह का यहां से हिस्सा जाता है। हर सरकारी काम में किसी न किसी के नाम पर मोटी रकम उतरती है। यहां का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी लक्जरी वाहनों के काफिले में चलता है। करोड़ की तो सिर्फ गाड़ियां है और सम्पति अरबों की जुटा रखी है। एसएसपी आरके भारद्वाज ने स्पष्ट कर दिया है कि मामले की जानकारी शासन को देने के साथ डीरेका में चल रहे गोरखधंधे की सीबीआई जांच के लिए संस्तुति की जायेगी।

सत्ता परिवर्तन का नहीं होता असर

केन्द्र और प्रदेश में सरकार किसी की हो और विभागीय मंत्री कोई बने। इसका असर यहां पर होने वाले टेंडर की वसूली पर नहीं पड़ता। बताया जाता है कि पूर्वांचल के हर गिरोह से जुड़े गुर्गें यहां पर मौजूद हैं। कहने को यह मामूली चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं लेकिन इनका तेवर यूं रहता है कि आला अफसर तक अरदब में रहते हैं। काम करना तो दूर यह सिर्फ अपना वर्चस्व जाहिर करने के लिए परिसर में चक्रमण करते हैं। बहरहाल एक पूर्व विधायक के करीबी पर शिकंजा कसने पर जो खुशियां थी वह अपने पर आंच आता देख काफूर हो गयी है। अब नये सिरे से मोर्चेबंदी की जी रही है जिसके वर्चस्व बना रहे और वसूली न बंद हो।

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