‘नकदी’ तो है तैयार लेकिन पिछला हश्र देख कोई ‘बांटने’ को नहीं हो रहा तैयार, पुलिस भी घात लगा कर रही ‘इंतजार’

जौनपुर। सुरक्षित सीटों पर होने वाले चुनावों में अमूमन सामान्य या पिछड़ा वर्ग की अधिक दिलचस्पी नही रहती। पार्टियों से जुड़े लोग तो सक्रिय रहते हैं लेकिन दूसरे वोटिंग तक को लेकर उदासीन रहते हैं। बावजूद इसके यहां की एक सीट पर सबकी नजर है। वजह, प्रत्याशी कुछ ऐसा ‘दमदार’ है जिसकी खातिर अरसे से लोग बेकरार है। सभी ने दबाव बना रखा है कि वोट का पूरा प्रबंध हो चका है बस ‘खर्चा-पानी’ का जुगाड़ हो जाये। प्रति वोट सैकड़ों रुपये की डिमांड है। सूत्रों की माने तो प्रत्याशी ‘साहब’ रजामंद भी हैं लेकिन वितरण का कोई हौसला नहीं जुटा पा रहा है। दरअसल मौजूदा कप्तान आशीष तिवारी ने पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान कुछ ऐसी रंंगेहाथ गिरफ्तारी करायी थी जिसके बाद से उनका खौफ सिर पर चढ़ कर बोल रहा है।

हाइटेक कप्तान, सूंघ लेते हैं बाते तमाम

सूत्रों की माने को प्रत्याशी का तरफ नोटों की गड्डियां तैयार होने का भरोसा दिला गया है। शर्त यही रखी गयी है कि वितरण करने वाला इसे नियत स्थान से उठाये और हमारे ‘आदमी’ के सामने बांट दे। इस पर कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। सभी को खौफ है कि हाइटेक कप्तान तमाम नंबरों को सर्विलांस पर रखते हैं और धन के लेन लेनदेन की बात सूंघ ली तो सलाखों के पीछे जाना तय है। पिछली दफा तो उन्होंने फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली महिलाएं जो एक प्रत्याशी का रिश्तेदार बता रही थी उन्हें भी नहीं छोड़ा था।

टाला जा रहा अंतिम समय पर सौदा

दशा यह हो चुकी है कि लंबे समय तक प्रदेश की शीर्ष सत्ता के करीबी रहे लोग जो कलेक्टर-कप्तान को निर्देशित करते रह चुके हो उनकी भी हिम्मत जवाब दे रही है। सूत्रों के मुताबिक अब वह अंतिम समय के लिए मामला टालते फिर रहे हैं। उनका कहना कि जब फोर्स किसी वीवीआईपी कार्यक्रम या चुनावी ड्यूटी की रवानगी में व्यस्त होगी उसी समय धन दिया जायेगा। देखना है कि मामला कितना कारगर होता है।

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