बिल्डर बलवंत हत्याकांड: अमूमन इतनी पुख्ता नहीं रहती पुलिस की चार्जशीट, हर साक्ष्य को समाहित करने का प्रयास

वाराणसी। तीन माह पहले बिल्डर बलवंत सिंह की हत्या के मामले में सारनाथ पुलिस ने अपनी विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया है। इसे एसएसपी प्रभाकर चौधरी का अपने स्तर पर किया पर्यवेक्षण माना जाये या हाइप्रोफाइल मामले को लेकर थाने स्तर बरती गयी गंभीरता लेकिन सभी जरूरी पहलुओं को शामिल कर लिया गया है। अमूमन दूसरे मामलों में पुलिस परिस्थिति जन्यसाक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर चार्जशीट तैयार कर लेती है लेकिन इसमें पुख्ता वैैज्ञानिक साक्ष्यों पर विशेष जोर दिया गया था। शनिवार को कोर्ट में दायर आरोपपत्र आरोपित पंकज चौबे को मिलने के साथ अदालत भी इसे संज्ञान में ले चुकी है।

लाइसेंसी पिस्टल की बरामदगी अहम सबूत

गौरतलब है कि 20 अक्टूबर की रात साढ़े 11 एसएसबी ग्रुप के चेयरमैन राम गोपाल सिंह के घर से मीटिंग के बाद बाहर निकल रहे बलवंत सिंह को गोली मार कर मौत की नींद सुला दिया गया था। कंपनी से ही जुड़ा रहा पंकज चौबे आरोपित था। दुस्साहसिक ढंग से वारदात को अंजाम देकर पंकज वहां से भाग निकला। इस मामले में नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने तलाश शुरू की तो पंकज को चौबेपुर के पास उस समय धर-दबोचा गया। तलाशी में उसके पास से लाइसेंसी पिस्तौल भी मिल गयी। पुलिस सूत्रों की माने तो फोरेंसिक जांच में स्पष्ट हो चुका है कि पंकज की पिस्टल से निकली गोली ही बलवंत की मौत का सबब बनी। विधिक जानकारों का कहना है कि वारदात के घंटों बाद पिस्टल का उसके पास से मिलना इस मामले की निर्णायक मोड बन सकता है।

पुलिस ने सभी गवाहों पर कसा यूं ‘शिकंजा’

संगीन वारदात के बाद जो एफआईआर दर्ज करायी जाती है उसमें बनाये गये गवाह अक्सर ट्रायल के समय बयान से मुकर जाते हैं। इस मामले में खास यह रहा कि चार्जशीट दाखिल करने से एक दिन पहले ही पुलिस ने मौका ए वारदात पर मौजूद जितेन्द्र सिंंह, आरपी सिंह और राम गोपाल सिंह का मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद बयान दर्ज करा दिया। पुलिस ने अपनी तरफ से पुख्ता कर लिया कि कोई गवाह अपने बयान से ‘पलटने’ न पाये। इसके अलावा भी जो दूसरे वैज्ञानिक प्रमाण पुलिस की तरफ से जुटाये गये हैं वह मर्डर मिस्ट्री को हल करने में मददगार साबित हुए।

पहले दिन से चार्जशीट तक अहम भूमिका रही

कत्ल सरीखी संगीन वारदात का पर्यवेक्षण डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारी करते हैं। बलवंत की हत्या के मामले में सीओ कैंट का कार्यभार एएसपी स्तर के अधिकारी के जिम्मे रहा। खास यह कि वारदात की सूचना मिलने के बाद मलदहिया स्थित निजी अस्पताल में सबसे पहले पहुंचने वाले आईपीएस मो. मुश्ताक ने ही इसका पर्यवेक्षण किया। उस समय वह सीओ चेतगंंज का प्रभार देख रहे थे लेकिन बाद में सीओ कैंट के रूप में उन्होंने एक-एक बिन्दु को जांच के दायरे में रखा। यह भी संयोग कहा जाये कि जब एफआईआर दर्ज हो रही थी तो वह तत्कालीन सीओ एएसपी अनिक कुमार के साथ सारनाथ थाने पहुंचे थे और सभी लोगों से जानकारी ली थी।

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