वाराणसी। सूबे में सत्ता के परिवर्तन के बाद अधिकारी तोते की तरह आंख फेर लेते हैं इसका नमूना पहले भी सपा के पूर्व सांसद जवाहर लाल जायसवाल देख चुके हैं। बसपा के शासन काल में उनके खिलाफ मुकदमों की सिरीज चली थी और 21 माह तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा था। योगी सरकार में भी उनके दिन अच्छे नहीं रहने वाले हैं। इसकी बानगी उस समय देखने को मिली थी जब पिछले माह वीडीए ने रमाडा होटल के पिछले हिस्से में हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया था। एक स्वजातीय विधायक के चलते कुछ राहत मिली लेकिन इस बाद मामला सीधे योगी से जुड़ा है। सूत्रों की माने तो किसानों ने सीएम से मिल कर गुहार लगायी थी जिसके बाद कार्रवाई के संग मानीटरिंग के आदेश सीधे पंचम तल से जारी किये गये। खास यह कि शिवपुर निवासी राकेश न्यायिक ने मामले को लेकर पत्राचार जारी रखा और सीएम से लेकर आला अफसरों तक से शिकायतें की।

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बैंकों का भी है खासा बकाया

राकेश न्यायिक का कहना है कि जवाहर जायसवाल ने सिर्फ किसानों का भुगतान नहीं किया बल्कि शुगर मिल के कर्मचारियों का भी पैसा नहीं दिया। यही नहीं कुशीनगर के पंजान नेशनल बैंक और यूनियन बैंक आफ इंडिया की विभिन्न शाखाओं से भारी रकम कर्ज के रूप में ली। इसमें रमाडा और जेएचवी के अलावा प्रकाश टाकिज और लालपुर की कोठी को गिरवी रखा गया। शिकायत डीआरटी इलाहाबाद से की गयी तो उसके जरिये अखबारों में निलामी की नोटिस भी प्रकाशित हो चुकी है। बावजूद इसके बैंककर्मियों की मिली भगत नतीजा है कि इसे अब तक कुर्क नहीं किया जा सका है। इसकी शिकायत वित्त मंत्री अरुण जेटली से लेकर तमाम अधिकारियों से की जा चुकी है।

पुत्र व पत्नी भी बने हैं पार्टी

जेएचवी और रामाडा में चस्पा किये गये आदेश में जवाहर जायसवाल के संग श्रीमती प्रार्थना जायसवाल, पुत्र गौरव जायसवाल व अमित जायसवाल के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गयी है। उल्लेखनीय है कि बता दे कि सोयेपुर जहरीली शराब कांड, डीआईजी बंगला कांड सहित कई मामलों में पूर्व सांसद के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं जिसमें कुशीनगर के चार मामले शामिल हैं। यहां दर्ज मामलों में तो जेल तक जाना पड़ा था। बावजूद इसके रमाडा के लीगल एडवाइजर ने इस कार्यवाही को द्वेषपूर्ण बताते हुए मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया है।

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