वाराणसी। मानवाधिकार और महिला मुद्दों पर काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था ब्रेकथ्रू और महिला स्वरोजगार समिति ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर अस्सी घाट पर कथक संध्या का आयोजन किया े इस अवसर पर किशोरियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के अधिकारों पर आधारित नृत्य और संगीत प्रस्तुति दी गई। ब्रेकथ्रू की स्टेट हेड कृति प्रकाश ने कहा कि अकसर हम सुनते हैं कि जितनी चादर हो उतना पांव पसारो। यानी जितनी आपकी क्षमता हो उतना ही बड़ा सपना देखो लेकिन अब वक्त आ गया है इस सोच को बदलने का। हमें अपनी क्षमता बढ़ाने पर जोर देना होगा,खास तौर से जब हम लड़कियों की शिक्षा पर बात करें तो वहां भी हमें यही दिखता है कि बस उनको इतना पढ़ा दो कि शादी हो जाए या जितना जरूरी हो उतना ही पढ़ाओं,अब हमें इस सोच को बदलने पर काम करना होगा बढ़े सपने देखनें होंगे, अपनी बेटियों की आंखों में बढ़ी उम्मीदें पैदा करनी होगी उन्हें छोटी नहीं बढ़ी सी आशा/बड़े सपनों के साथ जीना सिखाना होगा जिससे वो कामयाबी की नई उंचाई की नई-नई कहानियां लिख सकें,उनका किरदार बन सकें।

कथक व संगीत को बनाया माध्यम

इससे पहले कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए सुनील ने कहा कि काशी की इस पवित्र धरती से सामाजिक बदलाव के अनेक आंदोलन चले हैं। इस दिशा में बड़ी सी आशा हमारा एक प्रयास है उनकी लड़कियों की आवाज बनने का जिनके सपने अकसर सामाजिक बंधनों,नियमों में बंध कर दम तोड़ देते है। कथक और संगीत हमारे जीवन का अहम हिस्सा है इसलिए हमने इस मुद्दे का समुदाय के सामने रखने के लिए इसको एक माध्यम के रूप में चुना है। महिला स्वरोजगार समिति कि रेखा चौहान ने कहा कि हमारी लड़कियों को अब बड़ी सी आशा अपने मन में पालने की जरूरत है और समुदाय को भी इस दिशा में उनका साथ देना होगा जिससे वो नई-नई चीजों के बारे में जान सकें और अपने सपनों को मनचाही उड़ान दे सकें। कार्यक्रम में ब्रेकथ्रू की तरफ से विनीत, सलाहुद्दीन, सुप्रिया, अनिका, महिका, अर्जुन आदि ने शिरकत की।

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