वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की आबो हवा में तेजी से जहर घुलता जा रहा है। यहां का वातावरण दम घोंटू हो चुका है। ये हम नहीं बल्कि डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची बयां कर रही है। दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में वाराणसी तीसरे नंबर पर आ गया है। बनारस में प्रदूषण का आलम ये है कि बीते पांच सालों में यहां पर प्रदूषण तीन गुना बढ़ गया है। जानकारों के मुताबिक अगर समय रहते हालात को नहीं संभाला गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है।

दो गुना हुआ प्रदूषण का स्तर

वाराणसी का प्रदूषण विभाग बढ़ते हुए प्रदूषण के पीछे शहर में हो रहे विकास कार्य और गाड़ियों की बढ़ती संख्या को जिम्मेदार मानता है। प्रदूषण विभाग प्रभारी निरीक्षक  अनिल कुमार सिंह के मुताबिक इस समय वाराणसी में वायु प्रदूषण मानक से डेढ़ गुना तक ज्यादा है। मानक के अनुसार किसी भी शहर में प्रदूषण का स्तर 60 माइक्रो ग्राम पर मीटर होना चाहिए लेकिन मौजूदा दौर में ये आंकड़ा 90 माइक्रो ग्राम पर मीटर से भी ज्यादा है। ए के सिंह का कहना है कि अर्दली बाजार में पॉल्यूशन का लेवल नापने के लिए विभाग की तरफ से ऑटोमेटिक सेंटर बनाया गया है। यहां पर पीएम 10  मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से लगभग दुगना तक बढ़ा है। इसके अलावा पीएम 2.5 में मानक 60माइक्रोग्राम की जगह 78 से 90 के बीच रिकॉर्ड हुआ है, जो मानक से कहीं ज्यादा है। हालांकि प्रदूषण विभाग डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट को अबतक न देखने की बात कहकर बचने की कोशिश कर रहा है।

पांच साल में तेज हुआ प्रदूषण का स्तर

बनारस में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण से वैज्ञानिक भी हैरान हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर बीआरडी गुप्ता के मुताबिक बीते 5 सालों में बनारस में पॉल्यूशन का लेवल तेजी से बढ़ा है। इसकी मुख्य वजह है शहर में चल रहे विकास कार्य और गाड़ियों से निकलने वाले जहरीले धुआ है। सड़कों की खुदाई की वजह से शहर में धूल के कण तेजी से बढ़े हैं । यही कारण है प्रदूषण का स्तर 5 सालों में 3 गुना से ज्यादा हो गया है, जबकि वाहनों से निकलने वाले धुएं पर पॉल्यूशन कंट्रोल डिपार्टमेंट रोक लगाने पर पूरी तरह से नाकाम है। प्रोफेसर गुप्ता का कहना है कि इस दिशा में ठोस प्रयास होने की जरूरत है। जिसके लिए हर सरकारी विभाग को और स्थानीय लोगों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़ लगाने होंगे। अगर यह चीजें हुई तभी शहर में प्रदूषण का स्तर कम होगा नहीं तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे।

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