फागू चौहान के बहाने बड़े वोट बैंक पर है भाजपा की नजर! ऐसे ही नहीं बना दिया बिहार का गवर्नर

लखनऊ। केन्द्र सरकार ने शनिवार को जिन छह राज्यों के नये गवर्नर के नामों की घोषणा की उसमें सर्वाधिक चौंकाने वाला नाम फागू चौहान का रहा। बिहार के राज्यपाल बनाये गये फागू चौहान पुराने भाजपाई नहीं है बल्कि कुछ सालों पहले ही इंट्री हुई है। यह बात दीगर है कि पिछले विधानसभा चुनाव में चौहान सूबे में सर्वाधिक मतों से जीतने वाले विधायक थे। मऊ जिले की घोसी विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित फागू चौहान के बहाने भाजपा ने बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

नहीं कामयाब हुए थे अखिलेश

पूर्वांचल की कई सीटों पर चौहान वोट निर्णायक भूमिका में है। बावजूद इसके इस समुदाय से किसी को बड़े ओहदे पर जाने का मौका अब तक नहीं मिला था। पिछले लोकसभा चुनावों के पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चौहानों के नेता संजय को अपने पाले में लाने की कोशिश जरूर की थी। चंदौली से लोकसभा का टिकट भी दिया लेकिन वह जीतने में सफल नहीं हो सके थे। जानकारों को कहना है कि जातियों के साधने के क्रम में भाजपा ने फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल नियुक्त कर बड़ी जिम्मेवारी सौंपी है। इससे यह संदेश देने की भी कोशिश की है कि वह ‘सबका साथ-सबका विकास’ कर रही है।

विपक्ष की राजनीति से बनी पहचान

फागू चौहान ने भले अपनी कर्मभूमि घोसी बनायी लेकिन उनका जन्म पहली जनवरी 1948 को शेखपुरा आजमगढ़ में हुआ था। वह पिछड़ी जाति चौहान समुदाय से आते हैं। चौधरी चरण सिंह की पार्टी दलित किसान मजदूर पार्टी से 1985 में घोसी विधानसभा से पहली बार विधायक बने थे। वह 1991 में जनता दल से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 1996 और 2002 में भी वह विधायक बने लेकिन फिर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया। मायावती के नेतृत्व में 2007 में विधानसभा चुनाव भी जीते परन्तु 2017 का विधानसभा चुनाव फिर बीजेपी से लड़े और विधायक बने।

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