वाराणसी। बात-बात में राष्ट्रभक्ति और सैनिकों का सम्मान करने वाली भारतीय जनता पार्टी की कथनी और करनी में अंतर साफ नजर आया। जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए 32 आरआर के जवान रामबाबू की श्रद्धांजलि सभा में जिले का एक भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। जबकि खुद प्रधानमंत्री यहां से सांसद हैं। जिले की सभी आठों विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। मेयर और जिला पंचायत भी बीजेपी के ही सदस्य है। लेकिन सत्ता के गुरूर में चूर बीजेपी के जनप्रतिनिधियों के पास इतनी भी फुर्सत नहीं थी कि वो एक सैनिक का सम्मान करने के लिए उसके दरवाजे पहुंचते।

हरिश्चंद्र घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

इसके पूर्व शनिवार की रात को रामबाबू का शव बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचा। इसके बाद रविवार की सुबह 39 जीटीसी में उन्हें पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान गोरखा ट्रेनिंग सेंटर में जवानों, सेना के अधिकारियों, वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों तथा परिजनों ने उन्‍हें सलामी दी। इस दौरान शहीद के परिजनों के आंखों में आंसू के साथ दिल मे गर्व साफ झलक रहा था। हैरानी इस बात की है कि श्रद्धांजलि सभा में जिले का कोई भी जनप्रतिनिधि नही पहुंचा। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर हरिश्चंद्र घाट ले जाया गया। जहां पर उन्हें मुखाग्नि दी गई। शहीद की 2 वर्ष की बच्ची ने जब पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किया तो वहां माहौल गमगीन हो गया।

नेपाल के रहने वाले थे रामबाबू

रामबाबू शाही नेपाल के रहने वाले थे और 2013 में फौज में भर्ती हुए थे। शहीद का तीन वर्ष पूर्व सीमा शाही से विवाह हुआ था। शुक्रवार कोअलसुबह सेना की 32 राष्ट्रीय रायफल यूनिट के जवानों को सूचना मिली क्रालगुंड के पास एक गाव में आतंकी छिपे हुए हैं। ब्रिगेडियर हुकुम सिंह के अनुसार, उन्‍हें जब सूचना मिली की रामबाबू आतंकियों की गोली का शिकार होकर घायल हो गए हैं और सेना के 92 बेस में भर्ती हैं, तो वहां संपर्क साधा गया। उस वक्‍त तक उनकी स्थिति काफी नाज़ुक। हालांकि, कुछ देर बाद ही उन्‍हें वीरगति प्राप्‍त हो गयी। शहिद का शव शनिवार देर रात विशेष विमान के जरिये वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट लाया गया।

 

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