भदोही। भाजपा विधायक रवीन्द्रनाथ त्रिपाठी एक बाद फिर से विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। डेढ़ दशक पुराने फर्जीवाड़े के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सोमवार को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। विधायक पर आरोप है कि उनहोंने जमीन का फर्जी अनुबंध तैयार कर कन्या विद्यालय के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से 20 लाख रुपए का फर्जी अनुदान लिया जबकि यह जमीन उनके नाम नहीँ थी। इसमें विधायक के पिता , भाई , बेटे के साथ छह लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्रकरण में पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक आनंदकर पाण्डेय की भी भूमिका संदिग्ध बतायी गयी है। इस मामले की एक प्रार्थनापत्र सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत विधायक के पड़ोसी कृष्णानंद तिवारी ने अदालत में दाखिल किया था। दूसरी तरफ पुलिस का दावा है की ऐसी शिकायत उसके पास नहीं आयी थी।

क्या है पूरा मामला

सुरियावां के चौगना निवासी विधायक के पड़ोसी कृष्णानंद तिवारी ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था जिसमें आरोप था कि जिस जमीन को विधायक ने फर्जी अनुबंध के आधार पर कन्या विद्यालय के लिए सरकार को 2008 में रजिस्ट्री किया है वह जमीन विधायक के नाम नहीं है। वह जमीन आराजी संख्या126 में रकबा 1.7910 हेक्टेयर के रुप में सहखातेदारों के नाम दर्ज है। इसमें विधायक के पिता विक्रमादित्य तिवारी का हिस्सा साढ़े तीन बिस्वा बनता है। लेकिन भाजपा विधायक और बेटे रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर मेरे हिस्से की जमीन भी कन्या विद्यालय के लिए सरकार को रजिस्ट्री कर 20 लाख रुपए का गलत तरीके से अनुदान हासिल किया। यह 14 बिस्वा संक्रमणीय जमीन है जबकि विधायक के पिता की हिस्सेदारी सिर्फ साढ़े तीन बिस्वा बनती है। वहीं जमीन विधायक के नाम भी नहीँ है। दूसरी बात वह मेरे हिस्से की जमीन है।

थाने से लेकर एसपी तक लगायी थी गुहार

प्रार्थनापत्र में आरोप लगाया गया है कि जमीन पर निजी घर बनवा लिया गया। अदालत में याचिका दायर करने वाले कृष्णानंद तिवारी का आरोप है कि जब हम सुरियावां पुलिस के पास गए तो सत्ता का रुतबा होने की वजह से पुलिस ने थाने से डांटकर भगा दिया। पुलिस अधीक्षक भदोही से भी शिकायत किया लेकिन मुकदमा नहीं लिखा गया। जिसकी वजह से अदालत से गुहार लगानी पड़ी। दोनों पक्षकारों की दलील सुनने के बाद सीजेएम भदोही की अदालत ने भाजपा विधायक और परिजनों के खिलाफ फर्जीवाड़े की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।

भाजपा विधायक ने दी सफाई

भाजपा विधायक रवीन्द्रनाथ त्रिपाठी ने इस मामले में कहा है की सारे आरोप फर्जी है। जमीन पुस्तैनी है। उसका मुकदमा अदालत में विचाराधीन है। यह फर्जी रजिस्ट्री थी तो 17 साल लोग चुप क्यों थे। जांच में सब तस्वीर साफ हो जाएगी। फर्जी अनुदान का सवाल ही नहीं उठता है। यह मेरी छबि बदनाम करने की साजिश है। जांच में स्थिति साफ हो जाएगी।

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