वाराणसी। पूर्व एमएलसी चुलबुल सिंह लंबे समय से पूर्वांचल की राजनीति में सक्रिय थे। उनके अचानक निधन की खबर रविवार को तेजी से फैल गयी। शोक संंवेदना व्यक्त करने के लिए के सिर्फ भाजपाई ही नहीं बल्कि दूसरे दलों के लोग भी पहुंचे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्र नाथ पाण्डेय कौशांबी थे लेकिन पहले से निर्धारित सभी कार्यक्रमों को निरस्त करते हुए वह शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए वह पहुंच गये। कपसेठी हाउस पर सुबह से शाम तक लोगों का तांता लग रहा। अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंचा तो वहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। बड़ी संख्या में आने-जाने वालों के चलते संकरी गलियों में जाम की स्थिति घंटो तक बनी रही। मुखाग्नि बड़े पुत्र विधायक सुशील सिंह ने दी। कमी अखरी तो सिर्फ छोटे भाई एमएलसी बृजेश सिंह की जो न्यायिक अभिरक्षा में होने चलते नहीं पहुंच सके थे।

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आसपास के जिलों में भी था खासा प्रभाव

चुलबुल सिंह 12 सालों तक वाराणसी, चंदौली और भदोही से स्थानीय निकाय के एमएलसी थे। उनका प्रभाव आसपास के जौनपुर,गाजीपुर समेत कई जिलों में था। वह सिर्फ क्षत्रिय नेता नहीं बल्कि सभी वर्ग और समुदायों से जुड़े थे। बडे पुत्र सुशील को विधायक बनाने में उनका कम योगदान नहीं था। दूसरे पुत्र सुजीत ने भी पिता से राजनीति का ककहरा सीखा था जिसका नतीजा रहा कि जिला पंचायत की राजनीति में वह खासे सफल रहे।

यह भी पहुंचे थे संवेदना व्यक्त करने

सैयदराजा के विधायक सुशील सिंह व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुजीत सिंह ‘डॉक्टर’ से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों में राज्यमंत्री उपेन्द्र तिवारी व अनिल राजभर, पिंडरा के विधायक डा.अवधेश सिंह, एमएलसी केदारनाथ सिंह व चेतनारायण सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष वाराणसी हंसराज विश्वकर्मा, भदोही के सपा जिलाध्यक्ष आसिफ सिद्दीकी, भाजपा भदोही के जिलाध्यक्ष हौसिला पाठक, चंदौली के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छात्रबली सिंह आदि लोगों ने कपसेठी हाउस पहुंचे थे।

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