सहयोगियों के ‘मोर्चे’ से भाजपा मिली राहत, अनुप्रिया अपनी सीट पर मानी लेकिन दूसरी को लेकर यह है परेशानी

लखनऊ। केन्द्र और प्रदेश की सत्ता में पिछले कई सालों से साझेदार अपना दल (एस) के पिछले कुछ समय से तेवर दिखाने शुरू कर दिये थे। सपा-बसपा के गठबंधन के बाद भाजपा को लेकर तल्ख बयानबाजियों का दौर भी शुरू हो गया था। समय बीतने के साथ गठबंधन की तरफ से भाव नहीं मिला और एयर स्ट्राइक के बाद देश में राष्ट्रवाद की लहर को भांपते हुए पांव पीछे कर लिये गये। कायसों को उस समय विराम लग गया जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से साथ अनुप्रिया की मुलाकात के बाद घोषणा कर दी गयी कि इस बार भी अपना दल दो सीटों पर चुनाव लडेगा। एक तो अनुिप्रया की मीरजापुर है लेकिन दूसरे की घोषणा अभी नहीं की गयी है।

ललितेश के मैदान में आने से बदले सुर

अनुप्रिया को एहसास है कि केन्द्र और प्रदेश में साथ रहने के चलते सत्ताविरोधी लहर का सामना भी करना पड़ सकता है। दूसरी तरफ कांग्रेस की तरफ से पं. कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र और चौथी पीढ़ी के ललितेशपति सामने हैं। गंठबंधन की तरफ से राजेन्द्र बिंद के बाहरी होने और स्थानीय स्तर पर विरोध के चलते उन्हें मजबूत नहीं माना जा रहा है। अलबत्ता ललितेश की तरफ से प्रियंका से लेकर राहुल तक के आने को ध्यान में रखते हुए अनुप्रिया ने गठबंंधन बरकरार रखने में भलाई समझी है।

कई लोग करने में जुटे दावेदारी

गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में अपना दल को दूसरी सीट प्रतापगढ़ दी गयी थी। यहां से हरवंश सिंह सांसद चुने गये थे लेकिन एक पखवारे पहले उन्होंने अपना नया दल बना लिया है। अब अपना दल की दूसरी सीट के लिए कई दावेदार उभर कर सामने आये हैं। एक पूर्व सांसद जो अपने राजनैतिक पुनर्वास के लिए काफी समय से प्रयास कर रहे हैं उन्होंने सम्पर्क भी साधना शुरू कर दिया है। वह तो प्रतापगढ़ ही नहीं बल्कि समीपवर्ती जनपद से बी लड़ने के लिए तैयार बैठेहैं। शर्त इतनी है कि प्रत्याशी एनडीए के हो जाये इसके बाद वोटरों को साधना कठिन नहीं होगा।

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