बिगड़े ‘बोल’ तो ओमप्रकाश के खिलाफ कसने लगा कानूनी ‘शिकंजा’, चुनाव परिणाम आने के बाद बढ़ेगी ‘दुश्वारियां’

मऊ। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के बाद कई निकाय में चेयरमैन का दर्जा लेने पर भी सुबासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के तेवर केंद्र और प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा के खिलाफ तल्ख रहे। चुनाव के अंतिम चरण में तो वह गाली-गलौज से लेकर ‘जूता’ मारने तक बोल बोलने लगे। भाजपाइयों पर शुक्रवार को रतनपुरा के साहू मार्केट में जनसभा की अमर्यादित टिप्पणी अब गले का फांस बनती जा रही है। इस प्रकरण को लेकर मऊ के उड़न दस्ते के अधिकारी रूद्र भान पांडे ने शनिवार को थाना हलधरपुर में लिखित तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। दूसरी तरफ भाजपाई भी खासे खफा हैं और उन्होंने ओमप्रकाश के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा कायम करने के लिए अनुरोध किया है। यह तो तय हो गया कि सुभासपा से भाजपा का गठजोड़ खत्म होने के कगार पर है चुनाव परिणाम आने के बाद कुछ अहम फैसले लिये जा सकते हैं।

क्या था समूचा मामला

रतनपुरा के साहू मार्केट में शुक्रवार को ओमप्रकाश राजभर एक चुनावी जनसभा आयोजित थी। सभा के दौरान ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर आरोप लगते हुए अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए भद्दी गालियां तक दे डाली थी। ओमप्रकाश राजभर ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि भाजपा के लोग हमारे प्रत्याशी महेंद्र राजभर को हराने और हमारे समाज के लोगो का वोट हथियाने के मकसद से समाज में अफवाह फैला रहे हैं। अगर ऐसा करते हुए कोई भी भाजपा कार्यकर्ता मिले तो उसे पहले 10 जूते मारो। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस अभद्र टिप्पणी से भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।

बिरादरी के नेताओं को प्रमोट करने से भड़के

माना जा रहा है कि ओमप्रकाश राजभर अपनी बिरादरी के नेताओं को ‘प्रमोट’ किये जाने को लेकर खासे नाराज हैं। जिस वोट बैंक पर वह अपना एकाधिकार समझते थे उसकी खासी भीड़ भाजपा के राजभर नेताओं की सभा में जुटते देख वह आपा खो बैठे हैं। अब अपने वोट बैंक को साधने के क्रम में वह ‘शहीदी’ मुद्रा अपनाते हुए गाली-गलौज की भाषा पर उतर आये हैं। उन्हें लगता है कि इससे यदि खिलाफ में एक्शन लिया जाता है तो वह अपने लोगों को समझाने में सफल होंगे कि भाजपा पिछड़ों को लेकर रवैया सही नहीं रखी थी जिससे ऐसा हुआ। समस्या यह है कि प्रदेश का दूसरा प्रमुख गठबंधन सपा-बसपा उन्हें साथ नहीं ले सकता क्योंकि उनकी डिमांड पिछड़ों में आर्थिक आधार पर आरक्षण की है जिसका दोनों जनकर विरोध करते हैं।

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