वाराणसी। प्रदेश की जेलों में निरुद्ध कैदियों के मानवीय अधिकारों के संरक्षण की खातिर बीएचयू के विधि संकाय ने अनूठी पहल की है। विधिक सहायता एवं सेवा केन्द्र समन्वयक एसके गुप्ता ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि यदि सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है तो वीडियो कॉन्फ्रन्सिंग तकनीकी की सहायता से सीधे जेलों में बंद कैदियों को निशुल्क सहायता प्रदान करने का काम भी विधिक सहायता एवं सेवा केन्द्र द्वारा किया जायेगा। इस बाबत हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच में जनहित याचिका दाखिल की गयी थी जिसे स्वीकर करते हुए उन्होंने उच्च उत्तरदायी संस्थाओं के उच्च पदाधिकारियों की व्यक्तिगत रुप से 11 अक्टूबर को अगली सुनवाई में उपस्थित होने को कहा है।

कमेटी तैयार करेगी प्रस्ताव

इस पूरे मामले में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की विधिक सहायता एवं सेवा केन्द्र का पक्ष चीफ जस्टिट के सामने हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एएन भार्गव रखेंगे। इसी मामले में विधि संकाय के पूर्व छात्र विष्णु पाण्डेय बीएचयू को अपनी विधिक सहायता प्रदान करेंगे। पूरे मामले को देखने के लिये विधिक सहायता एवं सेवा केन्द्र की कोर कमेटी द्वारा जनहित याचिका कमेटी का गठन किया गया तथा कमेटी को यह जिम्मदोरी दी गई है कि वह इस केस से जुड़े सभी दस्तावेजों का अध्ययन करके कैदियों के मानवीय अधिकारों की संरक्षा हेतु सुझाव व प्रस्ताव तैयार करें। यह अपनी तरह का पहला प्रयास है जब किसी विश्विविद्यालय के विधि विशेषज्ञ कैदियों को निशुल्क सहायता प्रदान करेंगे।

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