भोला पाण्डेय हुई ‘बीमार’ तो जगी गुरू की ‘आस’, चुनाव लड़ने की खातिर काशी से सलेमपुर नहीं मानी दूरी

वाराणसी। बीएचयू से पले-बढ़े डा. राजेश मिश्र अब तक काशी को अपनी कर्मभूमि मानते रहे थे। स्नातक निर्वाचन से एमएलसी होने के बाद उन्होंने जीत का सिलसिला दोहराया भी था। कई बार से जीत रहे भाजपा सांसद शंकर प्रसाद जायसवाल को पराजित कर सांसद चुने गये लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में राजनीति के नौसिखिया डा. नीलकंठ तिवारी से मिली हार ने उनका विश्वास डगमगाने लगा। भले ही प्रियंका गांधी ने काशी प्रवास के दौरान किसी दूसरे नेता के बदले उन्हें तवज्जो दी हो लेकिन बावजूद इसके उन्होंने दूसरे सेफ सीट की तरफ जाने का मन बना लिया था। सलेमपुर के पुराने कांग्रेसी नेता भोला पाण्डेय की बीमारी के बाद उन्होंने इस सीट के लिए जोर आजमाइश का फासला लिया। भाजपा नेता कलराज मिश्र अब तक यहां से सांसद थे। चर्चाओं की माने तो अपने गृह जनपद की सीट काशी की तुलना में सेफ लगी जिससे वह वहां से चुनाव मैदान में हैं।

‘मोदी मैजिक’ के आगे टिकने की उम्मीद कम

सूत्रों की माने तो राजेश मिश्र ही नहीं बल्कि कांग्रेस के टिकट पर भले प्रियंका ही क्यों न मैदान में उतरे जीत के आसार कम हैं। पिछली बार चुनाव लड़ने वाले अजय राय उस समय पिण्डरा के विधायक थे लेकिन जमानत तक नहीं बची थी। दशकों से राजनीति के मैदान में रहे डा. राजेश म्श्रि भांप चुके थे कि काशी में जीत की आस तो दूर जमानत के लिए पिछला बार की तरह संघर्ष करना पड़ सकता है लिहाजा दूसरा स्थान उचत रहेगा।

बयानवीरों के लिए मैदान खाली

भले ही जीत हासिल न हो लेकिन पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले को देशी-विदेशी मीडिया में स्थान मिलने तय है। इसी खातिर यहां से राजेश मिश्र के जाने के बाद ‘बयानवीर’ एक बार फिर से सक्रिय हो गये हैं। दबी जुबान से पार्टी के नेताओं का कहना है कि औरंगाबाद हाउस का समर्थन भी इन्हें है और प्रियंका तो चुनाव लड़ने से रही अलवत्ता इनके लिए यही पर्याप्त है कि चुनाव प्रचार में आ जाये जिससे परिवार तक पैठ बनी रहे।

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