बलिया। रसड़ा से बीएसपी विधायक और कंस्ट्रक्शन किंग के नाम से मशहूर उमाशंकर सिंह पर योगी सरकार की नजरें टेढ़ी होने लगी है। सत्ता बदलते ही उमाशंकर सिंह पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। इसकी शुरूआत हुई है उमाशंकर सिंह की कंस्ट्रक्शन कंपनी छात्रशक्ति से। पीडब्ल्यूडी ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए उमाशंकर सिंह की कंपनी को काली सूची में डाल दिया। यही नहीं सरकार उन ठेकों की भी जांच शुरू करने जा रही है, जिसे उमाशंकर सिंह की कंपनी में बीएसपी और सपा सरकार के दौरान लिया था।

 

कंस्ट्रक्शन के बादशाह माने जाते हैं उमाशंकर   

कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में उमाशंकर सिंह की कंपनी छात्रशक्ति का बड़ा नाम है। चाहे मायावती का शासनकाल हो या फिर सपा की सरकार, छात्रशक्ति कंपनी का जलवा कायम रहा। खासतौर से पीडब्ल्यूडी और खनन के क्षेत्र में इस कंपनी के मुकाबले यूपी में दूसरी कोई बड़ी कंपनी नहीं थी।  आलम ये था कि बसपा सरकार में तो सड़कों पर केवल छात्रशक्ति के डम्पर और दूसरे कंस्ट्रक्शन में काम आने वाले वाहन दिखते थे। सोनभद्र में खनन में भी छात्रशक्ति का बड़ा दखल बताया जाता है। लेकिन यूपी की सत्ता में बीजेपी के आते ही उमाशंकर सिंह के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। लोकनिर्माण विभाग ने उमाशंकर सिंह की कंपनी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया है। हालांकि कंपनी के डायरेक्टर उनके छोटे भाई रमेश सिंह हैं।

 मायावती के खास सिपहसलार हैं उमाशंकर

बीएसपी के अंदर उमाशंकर सिंह की गिनती मायावती के खास लोगों में होती है। विधानसभा चुनाव में मोदी की लहर के बावजूद उमाशंकर सिंह ने जीत हासिल कर अपनी राजनैतिक हैसियत दिखाई थी। उमाशंकर सिंह दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। मायावती ने उनके कंधों पर राजपूतों को जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। छात्रशक्ति कंपनी पर हुई कार्रवाई से विधायक उमाशंकर सिंह के समर्थकों में नाराजदी देखी जा रही है। समर्थकों के मुताबिक बीजेपी सरकार में उमाशंकर सिंह के खिलाफ साजिश रची जा रही है।

गंवानी पड़ी थी विधायकी

सपा शासनकाल के दौरान उमाशंकर सिंह पर विधायक रहते सरकारी ठेका लेने का आरोप लगा था। लगभग पांच साल तक ये मामला अदालत में चलता रहा। चुनाव के ठीक पहले कोर्ट ने आदेश सुनाते हुए उमाशंकर सिंह की विधानसभा सदस्यता निरस्त करने का आदेश दिया था

 

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