इलाहाबाद। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के बाद परिजनों ने इसमें शासन से लेकर पुलिस-प्रशासन की संलिप्तता के आरोप लगाये थे। यहीं नहीं पत्नी सीमा सिंह के सुर से सुर मिलाते हुए परिजनों ने अंतिम संस्कार के समय भाजपा के केन्द्रीय मंत्री और विधायक ही नहीं बल्कि सीएम तक की संलिप्तता के आरोप लगाये हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। दरअसल इसको लेकर हाईकोर्ट की अधिवक्ता स्वाति अग्रवाल ने पहले से याचिका दायर कर रखी थी। पहले तो बागपत कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका थी लेकिन सोमवार को इसकी सुनवाई से पहले हत्या हो जाने पर 227 कंंस्टीट्यूशन आॅफ इंडिया की पेटेशन दायर कर दी। जस्टिस एसडी सिंह की एकलपीठ ने मजिस्ट्रेटी जांच को पर्याप्त मानते हुए याचिका खारिज कर दी। अब डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी जा सकती है।

स्वत: संज्ञान लेने का किया था अनुरोध

बसपा के पूर्व विधायक से रंगदारी मांगने के मामले में बागपत के सीजेएम ने बजरंगी का रिमांड बनाने का आदेश दिया था। इससे पहले भी 16 मई को बजरंगी की तरफ से सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दायर की गयी थी। बागपत के मामले में 9 जुलाई को सुनवाई से पहले अल सुबह हत्या हो जाने के बाद उनकी अधिवक्ता स्वाति अग्रवाल ने वारदात को पर स्वत: संज्ञान लेने के संग जेल में असलहा पहुंचने की जांच कराने की कोर्ट से मांग की थी। न्यायमूर्ति ने इस पर स्टेट से अनुदेश मंगाया था। बुधवार को सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया।

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