लखनऊ। बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के एक सप्ताह बाद पुलिस ने जांच का दायरा विस्तृत किया है। बजरंगी के मरने से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से किसे लाभ होगा। हत्या आर्थिक कारणों के चलते करायी गयी या पुरानी रंजिश के चलते इसे अंजाम दिया गयाा पुलिस इन्हीं सवालों को लेकर मत्था-पच्ची कर रही है। अलबत्ता बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह और रिटायर्ड डिप्टी एसपी जीएन सिंह उनके पुत्र प्रदीप सिंह समेत अन्य जिन लोगों पर संदेह जता रही है उनसे पूछताछ की जायेगी। एसपी जयप्रकाश ने स्वीकार किया कि पूर्व सांसद समेत जिन लोगों पर परिवार ने शक जताया है उनसे इसकी वजह पूछी जायेगी। वैसे भी पुलिस अब तक सौ से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है लेकिन कोई अहम सुराग नहीं मिला है।

खंगाली गयी हजारों फोन कॉल, संदेह के दायरे में दर्जनों

वारदात के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम से लेकर दूसरे साक्ष्य संकलित करने पर जोर दिया था। इसके बाद आरोपित सुनील राठी को दूसरी जेल में शिफ्ट कराने के बाद विवेचना पर ध्यान केन्द्रित किया। सूत्रों की माने तो डेढ़ हजार से अधिक फोन नंबरों के संग उनका डॉटा तक खंगाला गया है। पुलिस का फोकस है कि जेल से कॉल हुई तो किसने और कब की थी। सूत्रों की माने तो पांच दर्जन से अधिक नंबरों में आधे पूर्वांचल के हैं। पूरव-पश्चिम के इस गठजोड़ में कौन से सफेदपोश हैं और कौन सियासत से जुुड़े इनकी छंटनी की जा रही है। सम्भवत: यही कारण है कि पुलिस कुछ खुल कर बोल नहीं रही है।

समन्वय बैठक में चर्चा का बिन्दु राठी भी

वारदात के बाद सुर्खियों में आये सुनील राठी को लेकर भी पुलिस सतर्कता बरत रही है। अगले माह से आरम्भ होने वाली कांवड यात्रा के पहले दूसरे प्रदेशों की पुलिस के साथ समन्वय बैठक में राठी को लेकर चर्चा की जायेगी। उत्तराखंड और दिल्ली पुलिस से उसके गिरोह के बाबत जानकारी जुटाने के अलावा साझा आपरेशन के लिए प्रस्ताव रखा जा सकता है। इस बाबत खुल कर कोई नहीं बोल रहा है लेकिन मेरठ जोन की तरफ से पूरी तैयारी की जा चुकी है।

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