लखनऊ। लगभग तीन माह पहले बागपत जेल की तनहाइ बैैरक में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद पत्नी सीमा सिंह ने जिन लोगों पर संलिप्तता का आरोप लगाते हुए प्रार्थनापत्र दिया उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल सका है। तकनीकी बाध्यता के चलते पुलिस को इस मामले में चार्जशीट आठ अक्टूबर तक दाखिल करनी है। सूत्रों की माने तो पूर्व सांसद धनंजय सिंह, रिटायर्ड सीओ जीएन सिंह, उनके पुत्र प्रदीप सिंह और ठेकेदार विकास समेत जिन लोगों पर संदेह जताया गया था उन्हें क्लीनचिट देना पुलिस की मजबूरी बन गयी है। मामले के विवेचक इंस्पेक्टर खेकड़ा एसपी सिंह का कहना था कि आरोप पत्र तैयार हो चुुका है और जल्द ही कोर्ट में दाखिल कर दिया जायेगा।

सौ से अधिक लोगों के लिए बयान

पुलिस ने हाई प्रोफाइल मामले की चार्जशीट रस्म अदायगी के तौर पर नहीं तैयार की बल्कि इसके लिए खासी मशक्कत की है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि चार्जशीट में सिर्फ संदेह के दायरे में आने वालों के नहीं बल्कि सौ से अधिक लोगों के बयान लिये गये हैं। इसमें घटना के समय जेल में निरुद्ध कुख्यात अपराधियों से लेकर सामान्य बंदियों, जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों से लेकर बजरंगी के करीबियों तक को शामिल किया गया है। सीमा समेत कई लोगों का बयान लेने की खातिर तो पुलिस लखनऊ तक गयी थी। सीमा के आरोपों का समर्थन बयानों में नहीं किया गया है और जिन पर संदेह जताया गया उवका दूर से भी कोई वास्ता न होने की दलील मिली।

वीडियो कांफ्रेसिंग से राठी की पेशी, बढ़ा रिमांड

बजरंगी हत्याकांड में आरोपित बनाये गये पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया सुनील राठी की कोर्ट में पेशी कराने के बदले वीडियो कांफ्रेसिंग का सहारा लिया गया। गौरतलब है कि वारदात के बाद जेलर की तहरीर पर सुनील राठी के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया था। इसके बाद विवेचक तलाशी में गटर से पिस्तौल और मैगजीन बरामद होने पर धाराओं में बढ़ोत्तरी की थी। राठी की न्यायिक अभिरक्षा 17 अक्टूबर तक बढ़ाते हुए अगली सुनवाई की यही तिथि नियत की गयी है।

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